अढ़ाई वर्ष के ऊंचे ख्वाब

धूमल सरकार ने अपने अढ़ाई साल के कार्यकाल के दौरान हालांकि हर क्षेत्र में विकास को गति देने का पुरजोर प्रयत्न किया है, मगर  अभी भी पर्यटन एक ऐसा क्षेत्र है, जहां बहुत कुछ किया जाना बाकी है। इस क्षेत्र में योजनाएं तो बहुत बनाई गईं, मगर उन्हें अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। विशेष औद्यौगिक पैकेज में कटौती को लेकर भी मौजूदा सरकार को धक्का लगा है। ऐसे नए क्षेत्रों में औद्योगिक विकास संभव नहीं हो पाया है, जहां धूमल सरकार औद्यौगिक विकास के लिए प्रयास करने की तैयारी में थी। इस फेहरिस्त में कांगड़ा, मंडी, बिलासपुर, हमीरपुर उल्लेखनीय कहे जा सकते हैं। वर्ष 2003 में जो औद्यौगिक पैकेज स्वीकृत किया गया था, उसके तहत सोलन, ऊना और सिरमौर में ही ज्यादातर औद्योगिक विकास सुनिश्चित हो सका। यही वह क्षेत्र है, जिससे ज्यादा से ज्यादा रोजगार प्रदान किया जा सकता था।  औद्योगिक विकास के तहत प्रदेश में 400 के लगभग फार्मा यूनिट निवेश के लिए पहुंचीं। इनमें से ज्यादातर का रुझान बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ और काला अंब ही रहा। यदि फार्मा व अन्य यूनिटों को प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी निवेश के लिए रजामंद किया जाता तो स्थिति बदल भी सकती थी। यही नहीं, प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में औद्योगिक  प्रगति के नाम पर सीमेंट कारखानों व हाइडल परियोजनाओं को ही मंजूरी मिल सकी है। ऐसे कारखाने शिमला, मंडी, बिलासपुर में भी स्थापित किए जा रहे हैं। चंबा में सीमेंट कारखाने की योजना कई वर्षों से प्रस्तावित है, मगर गति नहीं पकड़ सकी है। बिलासपुर व कुल्लू में डिब्बा बंद मछली यूनिट स्थापित करने के ऐलान किए गए थे, मगर ये वित्तीय दिक्कतों के चलते सिरे नहीं चढ़ सके हैं। इसके लिए जहां पूर्व की कांग्रेस सरकार जिम्मेदार है, वहीं मौजूदा सरकार भी यदि इस संदर्भ में गंभीरता दिखाती, तो इन जिलों के लोगों को लाभ मिल सकता था। हालांकि वर्तमान में बागबानी विभाग  कांगड़ा में जहां वेजीटेबल प्रोसेसिंग हब स्थापित करने की तैयारी में है, वहीं शिमला के गुम्मा में फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने जा रहा है। शिक्षा, ऊर्जा, बागबानी, कृषि, पशुपालन और आईटी के क्षेत्र में प्रगति हुई है। शिक्षा विभाग के तहत राज्य सरकार ने 18 हजार पद भरने का ऐलान किया था। मगर अभी तक साढ़े सात हजार के लगभग पद ही भरे जा सके हैं। गुणात्मक शिक्षा की तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा सका है। गैर शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। आंकड़ों के मुताबिक हर साल लगभग 5 हजार शिक्षक सेवानिवृत्त होते हैं। इसके अनुपात में भरे जाने वाले पदों की संख्या काफी कम रहती है। अढ़ाई वर्षों के दौरान धूमल सरकार ने पंजाब के अनुरूप 5वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की हैं। किसानों को दस लाख रुपए तक के ‘ऋण मॉडगेज डीड’ पर स्टांप ड्यूटी व पंजीकरण फीस अदायगी की छूट दी गई है। महिलाओं को पंचायती राज संस्थाओं व स्थानीय निकायों में 50 फीसदी आरक्षण प्रदान करने वाला प्रदेश पहला राज्य बना है।  सेब व आम को फसल बीमा योजना के अंतर्गत लाया गया है। इस दौरान 460 ऐलोपैथिक व 85 आयुर्वेदिक डाक्टरों की नियुक्ति दूरदराज क्षेत्रों में की गई है।

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