अब मंडी जिला का ऑडिट, छह ब्लाकों में से तीन का सर्वे करने

पर सरकारी विभागों की पोल खुली

शकील कुरैशी, शिमला

भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक सिरमौर जिला के बाद मंडी जिला का ऑडिट करेंगे। सिरमौर जिला के छह ब्लाकों में से तीन ब्लाकों का सर्वे करने के बाद महालेखाकार ने सरकारी विभागों द्वारा बरती जा रही उदासीनता की पोल खोलकर रख दी है। महालेखाकार का मानना है कि जिलों में निष्क्रियता से हो रहे कार्यों का खामियाजा राज्य सरकार को केंद्र द्वारा पोषित योजनाओं में भुगतना होगा। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह ऑडिट रिपोर्ट पर गंभीरता से ध्यान दे। प्रदेश की प्रधान महालेखाकार रीता मित्रा ने पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि वे लोग सभी जिलों की अलग ऑडिट रिपोर्ट को सरकार को दे रहे हैं। इससे पहले शिमला जिला में चल रहे कार्यों में बरती जा रही अनियमितताओं को उजागर किया गया है, जिसके बाद सिरमौर की ऑडिट रिपोर्ट जारी हुई है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट तैयार कर खामियों को सरकार के सामने रखा जाता है और प्रदेश सरकार को इस पर कार्रवाई करनी होती है। लोक उपक्रम समिति के माध्यम से यह रिपोर्ट जारी होती है और यही समिति सरकार से भी जवाब तलब करती है। उन्होंने माना कि सरकारी कार्रवाई के बारे में समय पर जानकारी नहीं दी जा रही है, जो कि चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय योजनाओं और राज्य सरकार की योजनाओं का पूरा धन खर्च नहीं किया जा रहा है। जिला में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत मिले 7.37 करोड़ रुपए में से 2.03 करोड़ रुपए ही खर्च किए जा सके हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि सिरमौर जिला में मनरेगा के तहत लोगों को पूरा रोजगार नहीं मिल पाया है। लोगांे ने 100 दिन का रोजगार लेने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई है। ऐसे में विकास कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं, जिस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। प्रधान महालेखाकार लेखापरीक्षक ने बताया कि यह ऑडिट रिपोर्ट केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों को भेजी जाएगी, इससे उन्हें पता रहेगा कि केंद्र द्वारा दी गई प्रदेश में केंद्रीय योजनाओं पर किस प्रकार कार्य किया जा रहा है।

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