उद्योग निदेशालय बदलने को मुहिम

कार्यालय संवाददाता, शिमला

राजधानी के बीचोंबीच स्थित उद्योग भवन के निदेशालय को वहां से बदलने की कवायद फिर शुरू हो गई है। हाई कोर्ट की मांग पर सरकार इस भवन को खाली करवाने के प्रयास कर रही है। इस बाबत प्रदेश की मुख्य सचिव राजवंत संधू ने गुरुवार को भवन का दौरा किया। सूत्र बताते हैं कि निदेशालय के भवन निर्माण के लिए यह जमीन केंद्रीय लोक निर्माण विभाग से लीज पर ली गई है और इस पर कई शर्तें भी लगा रखी हैं। दूसरी तरफ कर्मचारी वर्ग भी इस सरकारी कवायद का विरोध कर रहा है।

उद्योग निदेशालय को बदलने की कवायद फरवरी माह में शुरू हुई थी। तब भी मामला काफी गरमा गया था, लेकिन अब एक बार फिर से इसे बदलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मुख्य सचिव राजवंत संधू ने गुरुवार को यहां का दौरा कर भवन की स्थिति का जायजा लिया और दूसरे पहलुओं पर गौर किया। इसके बाद मुख्य सचिव अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को देंगी, जिसके बाद अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि निदेशालय को यहां से कहीं दूसरी जगह बदला जाएगा, क्योंकि यह भवन हाई कोर्ट ने मांगा है। एडवोकेट जनरल को पहले ही इस भवन में तीन मंजिलें दी गई हैं, जिस कारण जिला उद्योग विकास अधिकारी का कार्यालय यहां से मजीठा हाउस में तबदील कर दिया गया, लेकिन अब पूरा का पूरा निदेशालय बदलने की तैयारी है।

यह जमीन केंद्रीय लोक निर्माण विभाग से वर्ष 1987 में लीज पर ली गई थी और उस समय यह शर्त लगाई थी कि इसमें सिर्फ उद्योग विभाग का कामकाज ही होगा, लेकिन अब सरकार इसे बदल रही है। उद्योग भवन वर्ष 1991 में बनकर तैयार हुआ, जहां रोजाना उद्योगपति आते हैं। इस समय यहां विभाग के 347 कर्मचारी तैनात हैं और उद्योग विभाग से जुड़ा खनन विभाग भी  यहीं काम कर रहा है। यदि इसे बदला जाता है, तो उद्योगपतियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि सरकार के पास कोई भी ऐसा दूसरा स्थान नहीं है, जहां एक जगह सभी कर्मचारी काम कर सकें। सरकार द्वारा ट्रिब्यूनल बंद करने के बाद हाई कोर्ट का कामकाज बढ़ गया है, जिसके बाद उन्होंने यह पूरा भवन देने की मांग रखी है। अब देखना यह है कि मुख्य सचिव इस पर क्या रिपोर्ट देती हैं।

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