एंडरसन का ठीकरा

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने राज्यसभा में भोपाल गैस त्रासदी पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी का बचाव क्यों न किया हो, अब भी कुछ ऐसे प्रश्न शेष हैं, जो जवाब मांगते हैं। ‘भोपाल गैस त्रासदी’, जिसने 20 हजार से अधिक लोगों की जान ली थी, के समय मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके अर्जुन सिंह अपनी सफाई के बावजूद यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि तब यूनियन कार्बाइड के पूर्व प्रमुख वारेन एंडरसन को देश से सुरक्षित निकालने के लिए कौन जिम्मेदार था। अर्जुन सिंह के अनुसार एंडरसन को सुरक्षित निकालने में तत्कालीन
प्रधानमंत्री राजीव गांधी की कोई भूमिका नहीं थी। इसके बजाय उन्होंने इसका ठीकरा तब के गृह मंत्रालय पर फोड़ने के साथ गृह मंत्री को उसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। उस
समय पीवी नरसिंह राव गृहमंत्री थे, जो बाद में प्रधानमंत्री भी बने। अर्जुन सिंह ने इस बारे में गृह मंत्रालय से प्राप्त फोन
का उल्लेख भी किया है। आज जब इस बात का जवाब देने के लिए नरसिंह राव इस दुनिया में मौजूद नहीं हैं, उनके
खिलाफ इस तरह का दोषारोपण करना आसान है। क्या इसका यह अर्थ हुआ कि इस प्रकरण से तब के प्रधानमंत्री
अनभिज्ञ थे और किसी दूसरी ताकत के हस्तक्षेप से एंडरसन को सरकारी विमान से भोपाल से रवाना किया गया।
यही कारण है कि इस मामले में अपनी मासूमियत जाहिर करने वाले अर्जुन सिंह ने एंडरसन की भोपाल से रवानगी पर विस्तार से कहने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि
उससे पीड़ा और कटुता बढ़ेगी। अर्जुन सिंह का बयान मामले की असलियत जाहिर करने के बजाय उसे कहीं अधिक
छिपाता प्रतीत होता है। यहां इससे संबंधित मामले पर सरकार की असंवेदनशीलता तो उजागर होती ही है, हजारों लोगों
की मौत का कारण बने एंडरसन को बचाने की कोशिश भी नजर आती है। क्या यह तथ्य चिंताजनक नहीं है कि जहां भोपाल
गैस त्रासदी के प्रभावितों के लिए मुआवजों की राशि 3900 करोड़ रुपए बनती थी, उसे सरकार व यूनियन काबाईड के
बीच अदालत से बाहर समझौते के तहत केवल 615 करोड़ रुपए में निपटा दिया गया। जहां एंडरसन आज तक कानून के हवाले नहीं किया जा सका, हादसे के 25 साल बाद कुछ लोगों
को हल्की सजा सुनाकर छोड़ दिया। इस लिहाज से केंद्रीय मंत्री पी चिंदबरम ने पहली बार भोपाल गैस त्रासदी में सरकार के अपराध को स्वीकार किया तथा शासन द्वारा उसे गंभीरता से लेने की बात स्वीकार कर मानवता के विरुद्ध हुए इस भीषणतम नरसंहार की जघन्यता को अंगीकार किया है। प्रधानमंत्री राजीव गांधी को क्लीन चिट देने के लिए अब कुछ भी क्यों न कहा जा रहा है, भोपाल गैस त्रासदी और उसके लिए एंडरसन जैसे दोषी पाए जाने वाले लोगों को संरक्षण देने के कांड पर से पर्दा उठाया जाना जरूरी है।

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