एचआरटीसी वर्कशॉप्स बनीं शोपीस

राकेश शर्मा, कुल्लू

हिमाचल पथ परिवहन निगम की प्रदेशभर में स्थापित वर्कशॉप्स मात्र शोपीस बनकर रह गई हैं। बसों की ज्यादातर रिपेयर बाहर की वर्कशॉप में की जा रही है। टायर व अन्य रिपेयर का खर्चा रोजाना एक डिपो का दो हजार रुपए के आसपास आ रहा है। इस तरह प्रदेश भर में स्थापित परिवहन निगम के 23 डिपुओं में चल रही बसों की रिपेयर व टायरों का खर्चा 50 हजार रुपए रोजाना आ रहा है, जो कि निगम की अपनी वर्कशॉप में नहीं, बल्कि निजी वर्कशॉप में खर्च किया जा रहा है। इस तरह निगम की वर्कशॉप्स शोपीस बनकर रह गई हैं। इसका खुलासा विभागीय सूत्रों द्वारा किया गया है। सूत्रों की मानें, तो गर्मियों का सीजन जो कि एचआरटीसी के लिए वरदान साबित होता है और इस सीजन में निगम मोटी कमाई कर लेता है, लेकिन इस बार निगम इस कमाई को करने से भी वंचित रह गया, क्योंकि एचआरटीसी की बसों के टायरों की स्थिति इतनी खराब थी कि इस बार निगम को प्रदेश में स्थापित 23 डिपुओं से लगभग पांच करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि अगर बसों के टायरों की हालत खस्ता न होती, तो उक्त पांच करोड़ रुपए के नुकसान से बचा जा सकता था। पहले से ही घाटे में चल रहा परिवहन निगम कब इस स्थिति से उबरेगा। यह कहना मुश्किल है। बहरहाल प्रदेश भर में स्थापित 23 डिपुओं की चल रही 1900 के करीब बसों में अगर कोई खराबी आ जाती है, तो उन बसों की रिपेयरिंग को निगम की वर्कशॉप में उचित तामझाम ही नहीं है, जिस कारण बसों के चालक-परिचालकों को बाहर के निजी वर्कशाप में बसों की रिपेयर करवानी पड़ती है, जिस पर एक डिपो का प्रतिदिन का खर्च दो हजार रुपए आ रहा है, जो उचित नहीं है। निजी वर्कशॉप में बसों की रिपेयर पर निगम को 50 हजार का खर्च रोजाना वहन करना पड़ रहा है

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