ओवरलोडिंग चलेगी छत पर न बैठें

दिव्य हिमाचल ः परिवहन विभाग संभालने के बाद का अनुभव कैसा है? क्या कुछ करने जा रहे हैं? 

 परिवहन मंत्री ः एक वर्ष के कार्यकाल के दौरान स्टाफ की दिक्कतें दूर करने से लेकर कम्प्यूटरीकरण के प्रयास किए जा रहे हैं। एचआरटीसी में ड्राइवरों के 600 खाली पद भरे गए हैं, जबकि कंडक्टरों के 134 पद भरे हैं। आठ सौ कंडक्टरों के नए पद अनुबंध आधार पर जल्द भरे जाएंगे। परिवहन विभाग के लिए भूतल एवं परिवहन मंत्रालय से छह करोड़़ 90 लाख रुपए की जीपीएस योजना स्वीकृत करवाई गई है। आठ एंबुलेंस भी मंत्रालय ने दी हैं। पांच हैवी क्रेन व तीन लाइट क्रेन मंजूर करवाई गई हैं।   

दिव्य हिमाचल ः प्राइवेट बस आपरेटर इतनी बड़ी जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ इतने बड़े वर्ग को रोजगार दे रहे हैं, बावजूद इसके उनके प्रति सरकार की सोच नकारात्मक क्यों? 

परिवहन मंत्री ः निजी बस आपरेटरों के प्रति सोच नरम है, यही वजह है कि ऑफ दि बसों में पांच दिन की और बढ़ोतरी कर दी गई है। पहले यह अवधि 46 दिन की थी, मगर इसे 51 कर दिया गया है। निरीक्षण संबंधी शिकायतों के निपटारे के तहत अब आरटीओ ही निजी बसों की चैकिंग के लिए अधिकृत किए गए हैं। बस के अंदर चाहे ओवरलोडिंग हो, छत पर नहीं लोग बिठाए जाने चाहिएं। इस बारे में भी स्पष्ट कर दिया गया है, क्योंकि निगम की बसों में भी ओवरलोडिंग रहती है।   

दिव्य हिमाचल ः  क्यों हर नाके पर एचआरटीसी को रोका नहीं जाता और प्राइवेट बसों की ऐसी की तैसी कर दी जाती है? यह नकारात्मक सोच नहीं है क्या? 

परिवहन मंत्री ः आरटीओ ही अब निरीक्षण के लिए अधिकृत है। ऐसी दिक्कतें अब नहीं आएंगी।  

दिव्य हिमाचल ः आप ने अपने कार्यकाल में कितने रूट बंद कर जन सुविधाओं को ठेंगा दिखाया है? क्या बताएंगे कि कितनी बसें कंडम होने के बावजूद खड़ी हैं और कितनी जीरो वैल्यू के बावजूद चली हुई हैं? 

परिवहन मंत्री ः हमने कोई रूट बंद नहीं किया। घाटे के रूटों पर वैट लीज आधारित बसें चलाने तक निगम की बस सेवाएं ऐसे मार्गों पर जारी रहेंगी।  

दिव्य हिमाचल ः एचआरटीसी के किसी भी डिपो में टायर नहीं हैं, बसें हर मोड़ पर खड़ी हो रही हैं, क्या यही
सुधार है? 

परिवहन मंत्री ः यह सच बात है कि टायरों की कमी है। निगम ने जेके टायर के साथ दिसंबर 2010 तक कांट्रैक्ट साइन किया था। अब टायरों की कीमतों में बढ़ोतरी हो चुकी है। कंपनी चाहती है कि निगम करार रद्द कर दे, हम नहीं चाहते। कमी को पूरा करने के लिए निगम के एमडी को हिदायतें दी गई हैं कि आवश्यकता के अनुरूप बिरला सहित अन्य कंपनियों से टायर खरीद करें। यदि करार तोड़ा, तो 18 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। 

दिव्य हिमाचल ः परिवहन निगम का विनिवेश क्यों नहीं कर देते। हर तीसरे माह किराया बढ़ा-बढ़ा कर जनता की रीढ़ तो सरकार पहले ही तोड़ चुकी है।  

परिवहन मंत्री ः विनिवेश… अभी सोचा नहीं। किराया बढ़ाने का फैसला कैबिनेट लेती है, मैं नहीं। घाटा तो काफी पहले से चला है, अभी की बात नहीं है।  

दिव्य हिमाचल ः क्या बात है, कोई भी सरकार हो, बस स्टैंड विवाद थमते ही नहीं? मंडी बस स्टैंड पर क्या हो
रहा है? 

परिवहन मंत्री ः मंडी बस स्टैंड बारे बताना चाहूंगा कि इसके निर्माण के लिए न तो सरकार पैसा दे रही है, न ही कोई एजेंसी। एचआरटीसी व बस अड्डा प्राधिकरण 25 करोड़ खर्च करके इस अड्डे का निर्माण कर रहे हैं। खर्चा वसूली के लिए कॉमर्शियल स्पेस निकालना पड़ रहा है, ताकि कमाई के भी साधन दिखें। बसों की एंट्री से ली जाने वाली थोड़ी-बहुत रकम से तो कमाई होगी नहीं। मंडी के व्यवसायियों को कॉमर्शियल कांप्लेक्स अखर रहा है। उन्हें अंदेशा है कि बाजार के बजाय इस कांप्लेक्स की तरफ लोग आकर्षित हो सकते हैं। यहीं से विवाद उठना शुरू हुआ है।

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