कड़छम-वांगतू प्रभावितों ने मुआवजा मांगा

दिव्य हिमाचल ब्यूरो, रिकांगपिओ

परियोजना निर्माण के दौरान फोरेस्ट प्रोड्यूस को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए काशंग परियोजना प्रबंधन एचपीपीसीएल द्वारा प्रत्येक ग्रामीण को 500 दिन का वेतन दिया गया है, जो कि एक अच्छा कदम है, लेकिन अब उसी की तर्ज पर जिला के अन्य क्षेत्रों के परियोजना प्रभावितों द्वारा भी मुआवजे की मांग की जाने लगी है। एक हजार मेगावाट कड़छम-वांगतू परियोजना प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों ने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र के  ग्रामीणों को भी 500 दिन का न्यूनतम वेतन फोरेस्ट प्रोड्यूस के नुकसान के  एवज में प्रदान करवाया जाए, ताकि परियोजना निर्माण के दौरान प्रभावित क्षेत्र में ग्रामीणों की संपदा को जो नुकसान हुआ है, उसकी क्षतिपूर्ति हो सके।

परियोजना प्रभावित ग्रामीण मीरू पंचायत प्रधान नरगु छेरिंग, उप प्रधान गोकल नेगी, वीरेंद्र नेगी तथा युधिष्ठिर आदि ने बताया कि जबसे कड़छम-वांगतू परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हुआ है, तब से ही क्षेत्र के ग्रामीणों को वन भूमि से प्राप्त होने वाली आय में कमी दर्ज हुई है। उन्होंने कहा कि जब से उक्त परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हुआ है, तब से न तो चिलगोजा की अच्छी पैदावार हो पा रही है और न ही घास पत्ती की अच्छी पैदावार हो रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व में चगांव से लेकर रूनंग तक हजारों क्विंटल चिलगोजा की पैदावार होती थी, जिससे क्षेत्र के प्रत्येक ग्रामीण को अच्छी आय प्राप्त होती थी, लेकिन जब से उक्त परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हुआ है, तब से क्षेत्र में चिलगोजे के पैदावार में भारी कमी दर्ज की जा रही है। हिम लोक जागृति मंच के संयोजक एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी आरएस नेगी ने बताया कि जिला के अन्य प्रभावितों को 500 दिन का वेतन दिया जाना चाहिए।

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