करसोग में छात्र नेताओं की भरमार

दिव्य हिमाचल ब्यूरो, मंडी

छात्र राजनीति से नेतागिरी चमकाने को आतुर छात्र नेताओं की करसोग में भरमार है। करसोग कालेज में चार छात्र संघों ने अपने पैनल उतारे हैं, जबकि एनएसयूआई ने लडभड़ोल तथा एबीवीपी ने रिवालसर में निर्विरोध चुने गए पैनल के कारण शुरुआती बढ़त बना ली है। इस बढ़त के कारण यह भी साफ हो गया है कि इस मर्तबा एबीवीपी और एनएसयूआई में कांटे का मुकाबला होगा। मंडी सहित जोगिंद्रनगर व सरकाघाट कालेज में भी त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार दिखाई दे रहे हैं। बासा, पद्धर, धर्मपुर और लंबाथाच जैसे नए खुले कालेजों में बीते वर्ष के मुकाबले कोई ज्यादा परिवर्तन होने की संभावनाएं कम ही हैं। करसोग कालेज में एबीवीपी, एनएसयूआई एसएफआई और एआईएसएफ ने पूरा—पूरा पैनल मैदान में उतारा है। मंडी जिला के अन्य कालेजों के मुकाबले यहां औसतन चार छात्र नेता ज्यादा हैं। करसोग कालेज में सबसे  अधिक 16 छात्र नेता चुनावी जंग में कूदे
हुए हैं।

सुंदरनगर, जोगिंद्रनगर, मंडी और सरकाघाट में तीन—तीन छात्र संघों ने औसतन 12—12 प्रत्याशी जीत तलाशने के लिए मोर्चे पर तैनात किए हुए हैं। लंबाथाच और पद्धर  कालेजों में एनएसयूआई और एसएफआई ने हाथ मिला लिया है और दोनों ही छात्र संगठनों ने एबीवीपी को एससीए से दूर रखने को चुनावी बिसात बिछा दी है। धर्मपुर में एसएफआई का बिस्तर गोल है, जबकि पद्धर में एसएफआई को पैनल के लिए पूरे छात्र नेता ही नहीं मिले हैं। यहां पर मात्र दो पदों पर एसएफआई जंग लड़ने की हिम्मत कर पाई है। बहरहाल छात्र संघ चुनावों में कांटे के आसार पैदा हुए हैं। शुक्रवार को तस्वीर साफ हो जाएगी, लेकिन इस बीच मतदाताओं को रिझाने की हर कोशिश की जा रही है।

सातवीं बार कसौटी पर भगवा

वल्लभ कालेज में बीते छह वर्षों से एबीवीपी का पूरा पैनल जीत हासिल कर रहा है। एनएसयूआई और एसएफआई हर बार टक्कर देकर भी जीत हासिल नहीं कर पाती है। शुक्रवार को एक बार फिर चोट बराबरी की है। ऐसे में क्या एबीवीपी सातवीं बार जीत का परचम लहरा पाएगी, यही सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।

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