कांगड़ा के उद्योगपति बारिश-कीचड़ से बेजार

, कांगड़ा। औद्योगिक क्षेत्र कांगड़ा के उद्योगपति मुसीबत में हैं, उन्हें भय है कि कहीं फिर बरसात हुई, तो फिर तबाही का सामना करना होगा। दरअसल हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश से उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ा है। बताते हैं कि बारिश का पानी उनके शैडों में घुस गया और लाखों रुपए का फर्नीचर व अन्य सामान बर्बाद हो गया। ऐसा पहली मर्तबा नहीं हुआ कि उद्योगपतियों को नुकसान झेलना पड़ा हो। बरसात के मौसम में जब भी मूसलाधार बारिश होती है, तब पानी शैडों में घुस जाता है और इन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ता है। यहां लंबे अरसे से कार्य कर रहे अविनाश वालिया कहते हैं कि जब से बस अड्डा बना है, पानी की निकासी बंद हो गई है। वह अफसोस प्रकट करते हैं कि उद्योग विभाग इस समस्या का कोई ठोस हल न निकाल पाया है। बकौल अविनाश वालिया कई बार इस सिलसिले उद्योग मंत्री व अधिकारियों से मिले। यही नहीं, मुख्यमंत्री धूमल को भी इस समस्या से अवगत करवाया गया। मुख्यमंत्री के आदेशों का भी कोई असर महकमे के अधिकारियोें पर न हुआ और समस्या वहीं की वहीं खड़ी हुई है। बताते हैं कि महकमे द्वारा यहां निरीक्षण भवन बनाने के बाद पानी की निकासी बिलकुल बंद हो गई है। आलम यह है कि इंडस्ट्रियल एरिया में कीचड़ ही कीचड़ हो गया है। यही रास्ता टेलीफोन कार्यालय को भी जाता है, वहां आने-जाने वाले सैकड़ों लोगों को भी मुश्किल हो रही है। पूरे इंडस्ट्रियल एरिया में कीचड़ फैल जाने से यहां महामारी फैलने का भी खतरा उत्पन्न हो गया है। इंडस्ट्रियल एरिया में अपना कारोबार कर रहे लोगों को गिला है कि दो वर्ष पूर्व जारी की गई नौ लाख रुपए की राशि को महकमा खर्च नहीं कर पाया है। यहां फर्नीचर उद्योग से जुड़े इंद्र सचदेवा का कहना है कि तकनीकी ढंग से कोई हल विभाग करे, तो राहत मिल सकती है। वह कहते हैं कि अगर पहले कोई ठोस कदम उठाए होते, तो यहां लाखों रुपए का नुकसान न झेलना पड़ता। कांगड़ा स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में करीब पांच दर्जन शैड हैं।  महाप्रबंधक इंडस्ट्रियल विभाग सतीश चौधरी का कहना है कि नालियों के टेंडर हो चुके हैं। यह कार्य पूरा होने पर सड़क की टायरिंग हो गई, तो समस्या हल हो जाएगी।

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