कांगड़ा के कैरोसिन पर कट

प्रवीण कुमार, धर्मशाला

कैरोसिन के कट ने पूरे जिला के चूल्हे की आग को ठंडा कर दिया है। कांगड़ा के कैरोसिन में इस बार 43 प्रतिशत कट लगा है। दिन-प्रतिदिन बढ़ रही महंगाई के साथ अब मिट्टी के तेल के कोटे में की गई कटौती ने मानो निर्धनों पर कहर बरपा दिया है। वहीं इस 43 प्रतिशत कट ने निर्धन परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है। जानकारी के मुताबिक प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार बिना एलपीजी गैस कनेक्शन धारक प्रत्येक राशन कार्डधारक को पांच लीटर कैरोसिन प्रदान किया जाता है। वहीं एलपीजी गैस कनेक्शन धारक को तीन लीटर कैरोसिन प्रदान किया जाता है, लेकिन इस बार कैरोसिन के कोटे में की गई 43 प्रतिशत कटौती ने निर्धनों को तगड़ा झटका दिया है। कैरोसिन कोटे में कटौती के कारण अब लोगों को एक से दो लीटर तेल में ही गुजारा करना पड़ रहा है। जानकारी के मुताबिक वर्तमान में कांगड़ा जिला में तीन लाख 82 हजार 335 राशन कार्डधारक और 963 सरकारी उचित मूल्य की दुकानें हैं। उक्त 963 सरकारी उचित मूल्य की दुकानों से पूरे जिला के राशन कार्ड धारकों को कैरोसिन सप्लाई होता है। जंगलों में लकड़ी काटना तो पहले ही प्रतिबंधित है, वहीं राशन कार्डधारक को इस बार कम तेल मिलने से अधिकतर परिवारों को खाना पकाने की चिंता सताने लगी है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी कैरोसिन में दो बार कट लग चुका है। कैरोसिन कोटे में कटौती ने जहां गृहिणियों का बजट बिगाड़ दिया है, वहीं दूसरी ओर इस कैरोसिन कटौती ने वन विभाग का कार्यभार बढ़ा दिया है। कैरोसिन न मिलने से जंगलों के अंधाधुंध कटान को बढ़ावा मिलेगा। कैरोसिन कटौती से प्रदेश के जंगलों और पर्यावरण को खतरा पैदा हो गया है।

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