कांगड़ा में एनएसयूआई का डंका

मस्तराम डलैल, धर्मशाला

पांच साल बाद छात्र संघ चुनावों में एनएसयूआई ने कांगड़ा जिला को फतह कर अपनी जीत का परचम लहराया है। क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला सहित जिला भर के संपन्न 21 महाविद्यालयों के चुनावों में एनएसयूआई ने 37 सीटें जीत कर पहली बार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को 34 सीटों पर रोक दिया है। आठ सीटों पर एसएफआई ने लाल झंडा फहराया है। विद्यार्थी परिषद ने जिला के सबसे बड़े कालेज धर्मशाला समेत मंडमियाणाी, सुगभटोली तथा थुरल में सभी सीटें जीत कर एनएसयूआई तथा एसएफआई का सूपड़ा साफ कर दिया। इसके विपरीत एनएसयूआई ने पांच कालेजों में क्लीन स्वीप कर दूसरे संगठनों का सफाया कर दिया। पालमपुर के केएलवी में सभी चार सीटें निर्दलीय के खाते में गई हैं तथा ढलियारा कालेज में एक सीट एचसीएस संगठन के खाते में गई है। वर्ष 2005 के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की जिला में पहली हार है। सबसे चौंकाने वाला नतीजा क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला में सामने आया, जहां पर प्रेजिडेंट पद को छोड़ कर अन्य सभी सीटें विद्यार्थी परिषद ने झटक लीं। डिग्री कालेज धर्मशाला में अपनी परंपरागत छवि के अनुसार विद्यार्थी परिषद ने फिर क्लीन स्वीप कर एनएसयूआई का सपूड़ा साफ कर दिया। नगरोटा बगवां में दो सीटें एनएसयूआई और दो विद्यार्थी परिषद को मिलीं। शाहपुर, देहरी, ज्वालामुखी, पालमपुर तथा बड़ोह में पांचों कालेजों में एनएसयूआई का पूरा पैनल जीत कर आया। इनमें एनएसयूआई ने विद्यार्थी परिषद तथा दूसरे छात्र संगठनों को अपना खाता भी नहीं खोलने दिया। डीएवी कांगड़ा में एसएफआई ने चारों सीटें कर दूसरे संगठनों को धंूल चटाई। राजपुर में विद्यार्थी परिषद एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं हो पाई। यहां पर दो सीटें एनएसयूआई और इतनी ही एसएफआई के खाते में गईं। बैजनाथ में एनएसयूआई को मात्र एक सीट पर संतोष करना पड़ा और एसएफआई ने दो तथा विद्यार्थी परिषद को एक ही सीट मिल सकी। नूरपुर में तीन सीटें एनएसयूआई तथा एक विद्यार्थी परिषद को मिली। इंदौरा में एनएसयूआई तथा विद्यार्थी परिषद को एक बराबर दो-दो सीटें हासिल हुईं। ढलियारा में तीन सीटें विद्यार्थी परिषद और एक सीट एचसीएस को मिली। नौरा में भी एनएसयूआई तथा विद्यार्थी परिषद के बीच कांटे की टक्कर रही और दोनों को दो-दो सीटों पर संतोष करना पड़ा। जयसिंहपुर में तीन सीटें एनएसयूआई तथा एक विद्यार्थी परिषद को मिली। विद्यार्थी परिषद ने इसका बदला हरिपुर कालेज में लेते हुए यहां तीन सीटें झटककर एनएसयूआई को एक सीट पर समेट दिया।

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