काम पर लौटे आरकेएस डाक्टर

शिमला। प्रदेश के 400 आरकेएस डाक्टरों ने हड़ताल वापस ले ली है। बुधवार से इस वर्ग के सभी डाक्टरों ने सेवाएं जारी रखने का फैसला लिया है। मंगलवार को स्वास्थ्य सचिव पीसी धीमान और स्वास्थ्य निदेशक डा. विनोद पाठक के साथ करीब पांच घंटे तक बैठक के दौरान फैसला लिया कि विभाग डाक्टरों की मांगों को उचित तरीके से सरकार के समक्ष रखेगा। डाक्टरों से कहा गया कि वे अपनी सेवाएं जारी रखें। विभाग ने डाक्टरों को जारी नोटिस भी खारिज कर दिए हैं, जिसमें बर्खास्तगी की चेतावनी दी गई थी। उधर, स्वास्थ्य मंत्री डा. राजीव बिंदल फोन पर बताया कि दो दिन के बाद वह शिमला पहुंचकर डाक्टरों के मसले पर विचार-विमर्श करेंगे। उधर, संघर्ष समिति के अध्यक्ष डा. दिलबाग ने बताया कि विभाग के आश्वासन पर हड़ताल वापस ले ली है। इसेस पहले रेजिडेंट डाक्टर एसोसिएशन, (सेमडीकोट) स्टूडेंट एंड टीचर्स एसोसिएशन भी आरकेएस के पक्ष में उतर आई थी। वहीं हिमाचल मेडिकल आफिसर एसोसिएशन ने भी आरकेएस डाक्टरों की मांगों को सरकार के समक्ष बेहतर माहौल में रखने का विचार बनाया था। तीन दिन के सामूहिक अवकाश लेने पर सरकार द्वारा भेजे गए नोटिस को गलत ठहराते हुए प्रदेश के कई आरकेएस डाक्टरों ने इसे रिसीव नहीं किया था। अपनी मांगों पर अड़े प्रदेश के 400 आरकेएस और अपने जवाब को लेकर अड़ी सरकार की आगामी रणनीति भले कुछ भी हो, लेकिन खामियाजा मरीजों को साफ तौर पर भुगतना पड़ रहा था। गौरतलब है कि अभी भी प्रदेश के करीब 20 अस्पतालों में फार्मासिस्ट्स द्वारा ही इलाज किया जा रहा है। वहीं कुछ अस्पतालों में आयुर्वेद डाक्टर सेवाएं दे रहे हैं। मंगलवार को परिमहल में जहां आरकेएस डाक्टरों की नियुक्तिकरण को लेकर साक्षात्कार रखे गए थे, वहीं मांगों को जायज ठहराते हुए परिमहल में आरकेएस साक्षात्कार में डाक्टरों का कम रश देखा गया। सरकार ने कितने डाक्टर अवकाश पर गए हैं, जिला स्वास्थ्य प्रशासन द्वारा रिपोर्ट तैयार करने के आदेश दिए थे। उधर, शिमला में मंगलवार को डाक्टरों ने एडवांस स्टडी से होते हुए विधानसभा तक विरोध स्वरूप साइलेंट मार्च किया। साइलेंट मार्च में दो सौ डाक्टरों ने भाग लिया। डाक्टरों ने बैनर को दिखाते हुए सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखीं। आरकेएस संघर्ष समिति के अध्यक्ष डा. दिलबाग ने कहा कि आरकेएस डाक्टरों की मांगें जायज हैं।

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