घटिया मार्केटिंग ने तोड़ी आम की कमर

शिमला। नियम-130 के तहत शुक्रवार को सदन में विधायक योगराज द्वारा आम की मार्केंटिंग के लिए लाए गए प्रस्ताव पर कहा गया कि आम के हर वर्ष गिरते उत्पादन का कारण बेहतरीन माकंर्ेटिंग व्यवस्था का न होना है। इसी बेकद्री के चलते किसानों व बागबानों ने आम की फसलों की तरफ रुझान कम कर दिया है। आंकड़े पेश करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2006-07 में जहां आम का 22000 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ, वहीं 2007-08 में 18000 मीट्रिक टन, वर्ष 2008-09 में 20000 मीट्रिक टन और अब 2009-10 में 13000 मीट्रिक टन रह गया है। उन्होंने कहा कि आम के उत्पादन का 60 फीसदी कांगड़ा से ही निकलता है। इसकी खेती बिलासपुर, ऊना, हमीरपुर, मंडी, सोलन के कुछ भागों सहित चंबा में भी की जाती है।  इसकी मार्केंटिंग के लिए बेहतरीन प्रयास किए जाने चाहिए। विधायक कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि यदि फलों की मार्केंटिंग को प्रोत्साहित किया जाए, तो आर्थिक मजबूती आएगी।

राजनीति से ऊपर उठकर आम को बेहतरीन मार्केटिंग सुविधा प्रदान की जानी चाहिए। विधायक राकेश पठानिया ने कहा कि धूमल सरकार ने आम की मार्केटिंग व इसकी फसल को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 1998 से ही बेहतरीन प्रयास किए हैं। उन्होंने इस फसल को मौसम व वानरों से आने वाली समस्याओं से निजात दिलाने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि आम की फसल के लिए बीमा योजना के बारे में किसानों व बागबानों को जागरूक किए जाने की आवश्यकता है। विधायक देसराज ने कहा कि धूमल सरकार ने आम व संतरे को भी समर्थन देकर किसानों-बागबानों को राहत प्रदान की है। उन्होंने आम उत्पादित क्षेत्रों सहित अन्य इलाकों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर जोर देने की बात कही। विधायक सुजान सिंह पठानिया ने कहा कि कोहरे के कारण आम की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है। इसके बाद तूफान से भी आम के उत्पादकों को हानि होती है। लिहाजा ऐसे वक्त में सरकार सहायता करे, तो किसानों व बागबानों को बड़ी राहत मिल सकती है। विधायक निखिल राजौर ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि आम की उन्नत किस्मों की पैदावार को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। इसकी मार्केंटिंग की बेहतरीन व्यवस्था को भी सुनिश्चित बनाए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आम के जो परंपरागत पेड़ लगे हैं, उनसे जैविक आम पैदा होता है। लिहाजा यदि मार्केटिंग सुविधा के साथ-साथ प्रोसेसिंग इकाइयों पर ज्यादा ध्यान दिया जाए, तो उत्पादकों को इसका लाभ मिल सकता है।

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