चंडीगढ़ ऐसा तो नहीं था

मोहन मैत्रेय, पंचकूला

चंडीगढ़ दो प्रदेशों की राजधानी है और अपने में केंद्र शासित प्रदेश है। इस स्थिति में यहां कानून-व्यवस्था बेमिसाल होनी चाहिए, परंतु हालत इसके विपरीत है। यहां राजनेता हैं, उच्चाधिकारी हैं और उनको चंडीगढ़ में आवास सुविधा उपलब्ध नहीं, वे मोहाली तथा पंचकूला में घर बसाए हुए हैं। पाश्चात्य चकाचौंध ने आज हरेक को भ्रम में डाल रखा है। इसी का प्रभाव है कि मानवीय मूल्यों में गिरावट आ रही है और अराजकता तथा उच्छृंखलता का बोलबाला है। यूनिवर्सिटी हो या कालेज, होटल हो या कोई क्लब, अमीरजादों-अमीरजादियों और कतिपय उच्चाधिकारियों की बिगड़ी संतानों ने यहां कहर मचा रखा है। पंजाब यूनिवर्सिटी का कभी शैक्षणिक गतिविधियों के कारण देश ही नहीं विदेश में भी नाम था। आज प्रतिदिन समाचारपत्रों की सुर्खियों में यहां की मार-काट और यहां की अनुशासनहीनता छाई रहती है। गत दिनों दो अमीरजादियों ने तथाकथित शराब के नशे तथा कारों की तेज रफ्तारी में रात के समय दो बेगुनाहों की जान ले ली। जनविरोध हुआ, तो एक अमीरजादी, जिसका पहली रात को पुलिस सुराग नहीं लगा पाई थी, उसने विवश हो अगले दिन पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। कुछ समय के बाद शीघ्र उसे जमानत भी मिल गई। कहते हैं कि यह ‘सुकन्या’ कुछ दिन पहले ही विदेश से आई थी। यह भी देखना बनता था कि जो कार वह चला रही थी, उसके लिए वह क्या अधिकृत भी थी। अब नई ‘थ्योरी’ भी पेश की जा रही है कि कार वह नहीं, ड्राइवर चला रहा था। शायद ‘चंद सिक्कों’ से उसे मना लिया गया हो। इसके बाद एक अन्य घटना प्रकाश में आई। हरियाणा के पंचकूला निवासी एक आईएएस अधिकारी की दो लड़कियों ने अपनी कार से ‘स्कूटी सवार’ दो लड़कियों को घायल कर दिया।  वहीं अपनी कार छोड़ नौ-दो-ग्यारह हो गईं। प्रशासन को गंभीर चिंतन कर, समुचित व्यवस्था करनी होगी, ताकि इस सुंदर शहर पर मौत का साया न गहराए।

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