चंबा में एबीवीपी का सूपड़ा साफ

कार्यालय संवाददाता, चंबा

आखिरकार केंद्रीय छात्र संघ के चुनाव शांतिपूर्वक समाप्त हो गए तथा नतीजे भी उम्मीदों के मुताबिक ही सामने आए। राजकीय महाविद्यालय चंबा में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का सफाया ही हो गया तथा मुकाबला रहा एसएफआई व एनएसयूआई के बीच में।

हालांकि दोनों संगठनों ने दो-दो सीटें तो आपस में बांट लीं, मगर हार-जीत का अंतर बहुत कम रहा तथा दोनों में कांटे की टक्कर रही। वैसे अगर गौर किया जाए, तो इस बार मतदाता भी मतदान के प्रति कुछ उदासीन दिखे। कुल 1914 मतदाओं में से 1312 मतदाताओं ने अपने मतों का इस्तेमाल किया, जबकि 600 से ऊपर मतदाता वोट डालने ही नहीं आए। जीत-हार के अंतर में वोटों का रद्द होना भी किसी दल के लिए जीत दिलवा गया तथा दूसरे के लिए हार। मुख्य सभी चारों सीटों पर मुकाबला एसएफआई तथा एनएसयूआई के बीच रहा।

अध्यक्ष पद पर एसएफआई का उम्मीदवार मात्र 18 मतों से जीता तथा इसमें भी 45 मत रद्द हुए। यही हाल उपाध्यक्ष पद पर भी दिखा। हालांकि इस सीट पर एनएसयूआई के अक्षय कुमार 52 वोटों के अंतर से एसएफआई उम्मीवार को हराकर जीते, मगर यहां भी रद्द वोटों का मार्जिन 36 मत रहा। महासचिव की दौड़ में पहले पयदान पर एनएसयूआई ही रही, मगर यहां भी मतों का अंतर मात्र 15 रहा, जबकि रद्द वोटों की संख्या 35 रही। सहसचिव का पद एसएफआई की झोली में मात्र 34 वोटों से गया, जिसमें 33 मत अवैध करार दिए गए।

इन आंकड़ों पर अगर नजर दौड़ाई जाए, तो साफ हो जाता है कि मुकाबला बहुत कड़ा रहा। हालांकि एसएफआई इस बार दो सीटें जीतकर एक सीट के फायदे में रही, जबकि एनएसयूआई को एक सीट का नुकसान उठाना पड़ा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को इस हार-जीत से न तो लाभ हुआ, न हानि। वह जहां खड़ी थी, वहीं रही।

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