चीफ जस्टिस वन बचाने के हक में

शिमला। नागरिकों को बेहतर प्रशासन, सामाजिक न्याय और आर्थिक संपन्नता उपलब्ध करवाना विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका तीनों अंगों की जिम्मेदारी है। यह वक्तव्य हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस कुरियन जोसेफ ने रविवार को शिमला के चक्कर में नवनिर्मित न्यायिक परिसर में वन विभाग और हिमाचल प्रदेश विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम के उदघाटन अवसर पर दिया। पौधारोपण कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आरबी मिश्रा, दीपक गुप्ता, वीके आहूजा, सुरेंद्र सिंह, संजय करोल, कुलदीप सिंह, राजीव शर्मा तथा वीके शर्मा ने भी इस मौके पर देवदार, खनोर ओर बान के पौधे लगाए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पर्यावरण और वन्य प्राणी संरक्षण के लिए वनों का होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वन संपदा प्रत्येक प्रदेशवासी की जायदाद है और इसका संरक्षण निजी संपत्ति समझकर किया जाना सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। न्यायाधीश आरबी मिश्रा ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति यह संकल्प ले कि वह अपने जीवनकाल में कम से कम एक वृक्ष अवश्य तैयार करें। इस अवसर पर  प्रबंधक निदेशक राज्य वन निगम आरके गुप्ता, प्रबंधक निदशेक मिल्कफेड एसएस नेगी, निदेशक एचएफआरआई महेंद्र पाल, रजिस्टार हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय डीसी चौधरी तथा डीके शर्मा प्रधान सचिव कानून एसी डोगरा, प्रदेश विधि सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव जेएस महंतान, एसएल शर्मा निदेशक,  बीआर चंदेल तथा अशोक शर्मा व जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।

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