छात्र राजनीति कितनी तर्कसंगत

राजेश दत्त शर्मा, शिमला

प्रदेश के सभी कालेजों में पिछले काफी दिनों से चुनावों का माहौल बना हुआ है। छात्र अपना अधिकतर समय पढ़ाई के बजाय राजनीति करने में बिता रहे हैं। कई स्थानों से छात्रों की आपसी भिड़ंत के समाचार भी आए। इससे यह अवश्य लग रहा है कि इन चुनावों के कारण छात्रों में आपसी रंजिश निकालने का भी दौर चल रहा है। ऐसे में यह सवाल मन में बार-बार अवश्य उठता है कि छात्र राजनीति के मायने क्या हैं। वेसे भी हमारे प्रदेश के अधिकतर बच्चों की शिक्षा का स्तर अन्य प्रदेशों के बच्चों की तुलना में कमतर आंका जाता रहा है। इसलिए बेहतर तो यही लगता है कि हमारे प्रदेश के छात्रों को अपना समय राजनीति में बर्बाद करने के बजाय शिक्षा में लगाना चाहिए, ताकि उनका भविष्य बेहतर बन सके।

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