जमथल में ब्लास्टिंग से मकानों में दरारें

बिलासपुर। कोलडैम क्षेत्र की जमथल कालोनी में ब्लास्टिंग से मकानों में दरारें आ गई हैं। इससे अब मकानों में रहना खतरे से खाली नहीं है। ये घर कभी भी ढह सकते हैं। विस्थापितों व बीडीसी सदस्य बसंत राम संधू ने चेताया कि अगर एनटीपीसी प्रशासन ने शीघ्र मुआवजा नहीं दिया, तो वे आंदोलन छेड़ने को मजबूर होंगे। एनटीपीसी द्वारा निर्मित उपनगरी जमथल में विस्थापित बेहद दुखी हैं। एनटीपीसी द्वारा की जा रही भारी ब्लास्टिंग से उनके मकानों में दरारें आ गई हैं। इससे मकानों को खतरा पैदा हो गया है। लोगों की मानें, तो 2005 में कोलबांध प्रबंधन ने उन्हें प्लाट दिए थे। लोगों ने वहां मकान खड़े किए, लेकिन ब्लास्टिंग से वे ढहने के कगार पर हैं। कोलडैम निर्माण के चलते कालोनी से कुछ ही दूरी पर की जा रही ब्लास्टिंग लोगों के लिए सिरदर्द बन गई है। पिछले पांच साल से समस्या से निजात दिलाने को लेकर लोग डीसी, मुख्य सचिव तथा मुख्यमंत्री से मिल चुके हैं। आज तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है। न ही इस बाबत एनटीपीसी प्रबंधन ने कोई उचित कदम उठाया है। इस क्षेत्र की विडंबना यह है कि विधानसभा चुनाव से पहले यह क्षेत्र कोटकहलूर में शामिल था, लेकिन पुनर्सीमांकन के बाद अब यह क्षेत्र सदर में शामिल हो गया है। ऐसे में हालात ये हैं कि न को कोटकहलूर के विधायक और न ही सदर के विधायक इनकी सुध ले रहे हैं। इसके चलते लोगों ने ऐलान किया है कि जल्द समस्या का समाधान न हुआ, तो आंदोलन का रास्ता अख्तियार करने को विवश होंगे। स्थानीय लोगों तीलफू देवी, संती देवी, बोधा देवी, बरीकमू देवी, रोशनी देवी, बलदेव, काला राम, पूर्ण चंद, बालक राम, राजेश कुमार, देशराज, राकेश कुमार और रीता देवी आदि का कहना है कि ब्लास्टिंग के कारण उनके मकानों में दरारें आई हैं। उन्होंने इस बात पर रोष प्रकट किया कि एनटीपीसी अधिकारियों, प्रशासन और सीएम से शिकायत करने के बावजूद उस ओर से समस्या के समाधान को लेकर जरा भी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही।

लोगों ने बताया कि समस्या से कई बार तहसीलदार व प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत करवाया गया, लेकिन आज तक कोई भी मुआवजा नहीं मिला है। उधर, पूर्व बीडीसी सदस्य बसंत राम संधू ने बताया कि कोलबांध क्षेत्र में हरनोड़ा की उपनगरी सेड़पा जमथल में सभी लोग विस्थापित हैं।

उधर, एनटीपीसी के जनसंपर्क अधिकारी विश्वनाथ ने कहा कि एसडीएम, तहसीलदार व एनटीपीसी के अधिकारियों की एक कमेटी बनाई गई थी, शिकायतों पर यह समिति मुआवजा प्रदान कर रही है।

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