जुपिटर के गर्भ में एक और ग्रह

लंदन के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि हमारे सौर मंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति ने अपना आकार बढ़ाने के लिए पृथ्वी से करीब 10 गुना बड़े एक ग्रह को निगल लिया था। बृहस्पति पर की गई स्टडी से यह बात सामने आई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक बृहस्पति का आकार धरती से 120 गुना ज्यादा बड़ा है, लेकिन इसका अंदरूनी भाग या कोर बहुत छोटा है। इसका वजन धरती के द्रव्यमान का दो से 10 गुना तक है। इतने छोटे कोर के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि बृहस्पति का कोर एक जबरदस्त टक्कर के बाद वाष्पीकृत हो गया था। यह टक्कर धरती के आकार के 10 गुना आकार वाले ग्रह से हुई थी। चीन के पीकिंग यूनिवर्सिटी के शू लिन ली की अगवाई में वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि वह टक्कर कैसे हुई होगी। उनका कहना है कि टकराने वाला पिंड बृहस्पति के वातावरण से टकराने के बाद चपटा हो गया था। इसके बाद यह लगभग आधे घंटे बाद बृहस्पति के कोर से टकराया होगा। इस टक्कर से निकली ऊर्जा की वजह से ही बृहस्पति का कोर भाप बन गया होगा। इस कोर से निकली भाप में भारी तत्त्व थे, जो बृहस्पति के वातावरण में मौजूद हाइड्रोजन और हीलियम से मिल गए। यह घटना दो बातों पर रोशनी डालती है। पहली, कि बृहस्पति के कोर का आकार इतना कम क्यों है और दूसरी, कि बृहस्पति के वातावरण में इतनी अधिक मात्रा में भारी तत्त्व कैसे मौजूद हैं। इस स्टडी को करने वाली यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के डगलस लिन का कहना है कि अगर इस ग्रह की बृहस्पति से टक्कर नहीं होती, तो यह खुद एक विशाल ग्रह में तबदील होने वाला था। शनि ग्रह के वातावरण में भी भारी तत्त्वों की अधिकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब धरती से छोटे आकार के पिंड शनि के कोर तक पहुंचने से पहले ही टकराकर चूर हो गए होंगे, तो उनसे भाप बनकर निकले भारी तत्व ही शनि के वातावरण में शामिल हो गए। अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे पता चलता है कि विशाल ग्रहों में इतने अलग-अलग द्रव्यमान के कोर क्यों हैं। बहरहाल, सौर मंडल के निर्माण के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि नवजात सूर्य के आसपास चक्कर काटते नन्हे ग्रह टकरा कर बड़े ग्रह बने। इस टक्कर में छोटे ग्रह पिघल कर आपस में जुड़ गए और नए बड़े ग्रह बने। हमारी धरती और चांद भी मंगल और शुक्र के आकार के दो ग्रहों की टक्कर के बने हैं।

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