टुटू-कुनिहार सड़क जाम

कार्यालय संवाददाता, शिमला

ऊपरी शिमला की तरह राजधानी शिमला में भी सड़क किनारे ल्हासे गिरने का सिलसिला थम नहीं रहा है। इस पर प्रशासन की बेरुखी लोगांे पर भारी पड़ रही है। समय पर प्रशासन की तरफ से रास्तों को खोलने का काम नहीं किया जा रहा है, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है, वहीं लोग समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे। पिछले एक सप्ताह की बात करें तो राजधानी के भीतरी क्षेत्रों में कई जगहों पर पेड़ गिरने व ल्हासा गिरने से यातायात बाधित हुआ और लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। बच्चे स्कूल पहुंचने के लिए लेट हुए वहीं कर्मचारी भी समय पर कार्यालय नहीं पहुंच सके। मंगलवार को शहर के साथ लगते क्षेत्र टुटू में भी सुबह सड़क पर ल्हासा गिर गया, जिससे टुटू कुनिहार मार्ग पर यातायात बाधित हुआ। बताया जाता है दोपहर बाद तक भी इस मार्ग को सुचारू रूप से चलाया नहीं जा सका था। यहां छोटे वाहन मार्ग से निकल रहे थे, लेकिन कोई भी बड़ा वाहन नहीं गुजरा।

टुटू-कुनिहार मार्ग काफी ज्यादा व्यस्त रहता है, क्योंकि यहां से बसें सीधे नालागढ़ के लिए जाती हैं। ल्हासा गिरने के कारण सुबह नालागढ़-कुनिहार जाने वाली बसों की आवाजाही बाधित हुई। मजबूरन बसों को वापस बाइपास से तारादेवी मार्ग से होते हुए ममलीग के लिए भेजा गया, जहां से बसें कुनिहार पहुंचीं। वहीं टुटू के पास तक कुनिहार से पहुंचने वाली बसों को भी वापस तारादेवी बाइपास के लिए भेजना पड़ा। त्योहार के दिन लोग अपने घरों को जा रहे थे। शिमला में अधिकांश लोग कुनिहार क्षेत्र के रहते हैं, जो सुबह अपने घर जाने के लिए निकले, मगर रास्ते में पेश आई कठिनाई के कारण उन्हें काफी परेशानी हुई। शाम तक इस रूट पर बसों को तारादेवी बाइपास से भेजा जा रहा था। यहां बता दें कि तारादेवी बाइपास पर भी कई जगह भू-स्खलन था और वहां भी काफी परेशानी से ही बड़े वाहन गुजर पा रहे थे। इस वैकल्पिक व्यवस्था के कारण शिमला-कालका राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर भी वाहनों की संख्या काफी बढ़ गई, जिससे काफी भीड़भाड़ रही। टुटू-कुनिहार मार्ग पर मलबा हटाने का काम चल रहा है और प्रशासन का कहना है कि जल्दी ही रास्ते को खोल दिया जाएगा।

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