तबाही मचा सकता है दुनिया का फ्रीजर

दुनिया का फ्रीजर कहे जाने वाले साइबेरिया में बर्फ पिघलने से सबसे शक्तिशाली ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन से पृथ्वी के और अधिक गर्म होने की आशंका बन गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार पिघलती बर्फ से वातावरण में मीथेन गैस की अधिकता से तबाही मच सकती है। रूस के उत्तरी भाग में स्थित साइबेरिया, जिसे दुनिया का सबसे ठंडा प्रदेश कहा जाता है, में पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने की शुरुआत हो चुकी है, जिस वजह से उसमें दबी गैसें वातावरण में मिलने लगी हैं। दरअसल पर्माफ्रॉस्ट बर्फ के नीचे दबी मिट्टी की उस परत को कहते हैं, जो कम से कम दो साल तक लगातार शून्य से भी नीचे तापमान में रहती है। साइबेरिया की 80 प्रतिशत भूमि पर्माफ्रॉस्ट जोन में आती है, जिसकी गहराई 1 से 1.5 किलोमीटर तक है। इस जमी हुई जमीन की परत में दबे कार्बन जीवाश्मों (मृत जीव व सड़ चुके वनस्पति) की अधिकता से इसमें भारी मात्रा में मीथेन गैस बुलबुलों की शक्ल में जमा हो चुकी है। एक अनुमान के मुताबिक साइबेरिया के येडोमा पर्माफ्रॉस्ट में 500 गीगाटन कार्बन जमा है और मिश्रित पर्माफ्रॉस्ट में 400 गीगाटन कार्बन दबा हुआ है।

पानी में घुलती आग ः अनुसंधान के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया की जब इन बुलबुलों को तोड़ा गया, तो कई बार घर्षण की वजह से झील में से आग की लपटें निकल रही हैं। गौरतलब है कि मीथेन अत्यधिक ज्वलनशील गैस होती है और साइबेरिया में पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से मीथेन का बड़ी मात्रा में निकलना किसी भयानक संकट को जन्म दे सकता है।

अनुसंधान के आंकड़ों पर नजर डालें, तो पता चलता है कि पिछले 30 सालों में थर्मोकार्स्ट झीलों से मीथेन उत्सर्जन 58 प्रतिशत बढ़ा है। इसका कारण है कि झीलों के बनने और विस्तारित होने की प्रकिया में अब तक बर्फीली मिट्टी में जमा कार्बन घटक पानी में मिल जाते हैं और वे सड़ने लगते हैं, इस प्रकिया में मीथेन गैस का निर्माण होता है। इन झीलों की सतह पर गैस के बुलबुलों का निर्माण होने लगता है, जिसमें 90 प्रतिशत तक मीथेन गैस होती है। अब यहां मीथेन का इतनी बड़ी मात्रा में उत्सर्जन हो रहा है कि यह बुलबुले इन झीलों को सर्दियों में भी जमने नहीं दे रहे हैं। कई जगहों पर इन बुलबुलों द्वारा बनाए गए स्याह (हॉटस्पॉट) देखे जा सकते हैं। 2006 में जारी एक अनुसंधान रिपोर्ट के अनुसार पिघलती पर्माफ्रॉस्ट सालाना चार टेराग्राम मीथेन वातावरण में छोड़ रही है, जो किसी भी आद्र क्षेत्र के मुकाबले 63 प्रतिशत ज्यादा है। इसके बहुत ही घातक परिणाम हो सकते हैं, क्योंकि मीथेन को ग्रीन हाउस गैस माना जाता है, जो कार्बन डाइऑक्साइड से 23 गुना शक्तिशाली होती है।

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