तू उदास न हो

तू मत हो यूं दुखी उदास

तेरी मंजिल तो है तेरे पास

इन अंधेरों में मुंह न छुपाना

पथ की मुश्किलों से न घबराना

रोज टूटे पनघट पर लाखों घड़े

जीवन मृत्यु चक्र तो निरंतर चले

फिर मौत से प्राणी क्यों डरे

इन बातों से लेकर कुछ सीख

जीवन पथ की गाड़ी को घसीट

मंजिल की ओर बढ़ता ही जा

ऐसे एक दिन तू मंजिल को पा

           रवि सांख्यान,बिलासपुर

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