थम गई रफ्तार

शिमला। खस्ताहाल सड़कों को सुधारने की मांग कर रहे निजी बस आपरेटर शनिवार को एक दिन की सांकेतिक हड़ताल पर चले गए। दिनभर लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शिमला शहर के अलावा जिला के लगभग 300 रूट इस हड़ताल से प्रभावित हुए। शिमला शहर में चलने वाली 108 प्राइवेट बसों के पहिए भी हड़ताल के कारण थमे रहे। हिमालयन बस आपरेटर यूनियन के आह्वान पर बुलाई गई इस हड़ताल का सभी युनियनों ने समर्थन दिया। कांगड़ा, धर्मशाला, मंडी, बिलासपुर, सोलन, ऊना से शिमला के लिए आने वाली बसों को घणाहट्टी व शोघी से ही वापस कर दिया गया। निजी बस आपरेटरों ने परिवहन विभाग की अपील को भी दरकिनार किया। यूनियन ने प्रदेश सरकार को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कारवाई नहीं की जाती, तो वे अपने आंदोलन को उग्र रूप देने से भी पिछे नहीं हटेंगे। उन्होंने हड़ताल को पूर्णतः सफल बताया है। शिमला शहर में समरहिल, टुटू, सेरी, संजौली, ढली, न्यूशिमला, छोटा शिमला के लिए बसों की सबसे ज्यादा कमी देखी गई, जबकि ऊपरी शिमला में ठियोग, रोहड़ू, रामपुर जाने वाले लोगों को भी परेशानियों से दो चार होना पड़ा। हिमालयन ट्रांसपोर्ट यूनियन के अध्यक्ष महेंद्र चौहान, पूर्व अध्यक्ष पंकज चौहान रमेश कमल, शिमला निजी बस यूनियन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार बयानबाजी कर रही है कि सड़कों की हालत बेहतर है, मगर वास्तविकता किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने कहा कि ऊपरी शिमला के लिए जाने वाली सड़कों की हालत अत्यधिक दयनीय है। सड़क कम और उस पर गड्ढे अधिक नजर आते हैं। उन्होंने कहा कि बरसात के दिनों में जगह जगह ल्हासे आने के कारण सड़कों पर मिट्टी इकट्ठा हो चुकी है। खस्ताहाल सड़कों पर बसें चलाना आसान नहीं है। यूनियन ने परिवहन मंत्री पर भी वादाखिलाफी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि निजी बस आपरेटरों के साथ परिवहन मंत्री ने बैठक के दौरान यह आश्वासन दिया था कि एक ग्रिवियर कमेटी का गठन किया जाएगा। इस कमेटी में प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा यूनियन के लोगों को भी शामिल किया जाएगा। ब्लैक स्पॉट व अन्य जो भी समस्यांए आपरेटरों की होंगी, उसके समाधान को यह कमेटी सुलझाएगी।  उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो वे अपने आंदोलन को और उग्र करेंगे।

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