दुराचार प्रकरण ने उलझाए दो विभाग

धर्मशाला। नाबालिग से बलात्कार मामले की गुत्थी को सुलझाने में दो विभाग बुरी तरह उलझ गए हैं। इस नौ वर्षीय नाबालिग बलात्कार मामले ने विभाग के लिए एससी/एसटी अत्याचार अधिनियम 1989 व नियम 1995 के प्रभावशाली क्रियान्वयन के लिए भी चुनौती खड़ी कर दी है। बहरहाल इस नौ वर्षीय नाबालिग से हुए बलात्कार मामले ने पुलिस और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के पसीने छुड़ा दिए हैं। मामले के पांच माह बीत जाने के बाद भी दोनों ही विभाग बलात्कार करने वाले का कोई सुराग नहीं लगा पाए हैं। उक्त आरोपी दोनों विभागों की आंखों में धूल झोंक कर खुलेआम घूम रहा है। जानकारी के मुताबिक एक मार्च, 2010 को होली महोत्सव के दिन गांव व डाकघर घघड़ूही तहसील देहरा में अनुसूचित जाति की एक नौ वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ कुछ लोगों ने बलात्कार किया। जानकारी के मुताबिक उक्त क्षेत्र में कोई ऐसा गिरोह है, जो लड़कियों को घराट से पीहण (एक लघु कारखाना जहां गेहंू की पिसाई कर आटा निकाला जाता है) उठाने के बहाने बहला-फुसला कर गैंग रेप करता है। पुलिस विभाग ने भी इस बात को माना है। सूचना के मुताबिक इस क्षेत्र में पहले भी कई बलात्कार के मामले सामने आए हैं। पुलिस ने पीडि़ता का मेडिकल करवाकर आईपीसी की धारा 376 के तहत मामला दर्ज किया था, वहीं दूसरी और पीडि़ता के परिजनों का यह मानना है कि उच्च जाति के युवक ने बलात्कार किया है, जिस कारण यह मामला सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के पास अनुसूचित जाति/ जन जाति अत्याचार अधिनियम 1989 व नियम 1995 के तहत दर्ज है।

You might also like