धरोहरों का संरक्षण कैसे हो

धरोहरें हमारे समाज का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं। धरोहरें हमें हमारे प्राचीन इतिहास के विषय में बताती हैं कि हमारा अतीत कितना गौरवशाली था। इन धरोहरों के द्वारा ही हमारी आने वाली पीढि़यों को पता चलेगा कि हमारा अतीत कितना गौरवशाली था और इन्हीं धरोहरों के द्वारा विदेशियों को भी प्राचीन भारत के दर्शन होंगे। आजकल धरोहरें उचित रखरखाव न होने के कारण समाप्त हो रही हैं। हमारा और हमारी सरकार का कर्त्तव्य है कि इन धरोहरों का संरक्षण करें। इसके लिए हमें और हमारी सरकार को उचित कदम उठाने होंगे, ताकि हम अपनी धरोहरों को संरक्षित कर अपने गौरवशाली अतीत को सहेज कर रख सकें। सरकार को वेबसाइट के माध्यम से भी जानकारी उपलब्ध करवानी चाहिए, ताकि लोग इन धरोहरों की ओर आकर्षित हों और उनसे जो शुल्क प्राप्त हो, उसका प्रयोग उन धरोहरों के रखरखाव में खर्च करें। सरकार को चाहिए कि जहां भी हमारी ऐतिहासिक इमारतें हैं, वहां तक पक्की सड़कें बनाई जाएं, ताकि लोग आसानी से वहां तक पहुंच सकें। धरोहरों के प्राचीन स्वरूप को ही बरकरार रखा जाए, उनसे ज्यादा छेड़छाड़ न की जाए, ताकि लोग उनके प्राचीन स्वरूप को देख सकें। आज उचित रखरखाव न होने के कारण हमारी कई धरोहरें खत्म हो रही हैं। पंचायत स्तर पर ही हम गांववासियों को कदम उठाने चाहिए, पंचायत स्तर पर हम लोगों को कमेटियों का गठन करना चाहिए, जो कि अपने इलाके में इन धरोहरों का संरक्षण करें, ताकि इनका उचित संरक्षण हो सके। प्राचीन स्थलों पर पर्याप्त सुविधा उपलब्ध करवानी पड़ेगी, ताकि लोगों को इसका लाभ मिल सके।

दिनेश कुमार, चपलाह, चनौर, देहरा

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