धुंध में उखड़ी सांस, बरसात में अस्पतालों में बढे़ दमा के मरीज

शिमला। बरसात ने सांस के रोगियों के लिए आफत खड़ी कर दी है। धुंध ने प्रदेश के दो हजार अस्थमा प्रभावितों को अस्पताल के चक्कर काटने पर मजबूर कर दिया है। सभी अस्पतालों से मिली जानकारी के मुताबिक 20 दिन में दो हजार अस्थमा प्रभावितों ने इलाज करवाया है। प्रभावितों में 50 बच्चे सांस के रोगी हैं। इसके अलावा एक हजार बुजुर्ग हैं, जिन्हें बरसात की धुंध ने परेशान किया है। इन बुजुर्गों का आयु वर्ग 65 से 95 वर्ष के बीच में है।

इसके अलावा सांस रोगों से प्रभावितों में युवा वर्ग भी अस्पताल के चक्कर काटने पर मजबूर है, जिनमें दो सौ युवा वर्ग को इस धुंध ने परेशान किया है। प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों के साथ-साथ सीएचसी और हैल्थ सेंटर पीएचसी में सांस के रोगियों द्वारा इलाज करवाया जा रहा है। प्रभावितों द्वारा सांस फूलने की शिकायत की जा रही है। विशेषज्ञों की मानें, तो धुंध ने इस बार पिछले वर्ष के मुताबिक ज्यादा लोग प्रभावित किए हैं। कारण यही बताया जा रहा है कि प्रतिदिन बारिश हो रही है और जिनको धुंध युक्त क्षेत्र माना जाता है, वहां धुंध का प्रभाव अधिक है। 20 दिनों में प्रकाश में आए दो हजार सांस  रोगियों में 80 फीसदी रोगियों को इनहेलर की आवश्यकता पड़ी है। वहीं दस फीसदी प्रभावितों को इनहेलर के साथ-साथ दवाइयां लिखी गई हैं। अस्पतालों में आए सांस प्रभावितों में दस फीसदी रोगियों को धुंध से दूरी बनाए रखने के लिए कहा है। प्रदेश के दोनों मेडिकल कालेजों में भी धुंध से प्रभावित लोग इलाज करवाने पहंुचे हैं। मेडिसिन और चेस्ट एंड टीबी विभाग में प्रभावितों का इलाज किया जा रहा है। निजी क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इस बार जनता को धुंध से हो रही एलर्जी ने ज्यादा लोगों को प्रभावित किया है।

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