पाकिस्तान की बाढ़ और सरकार को चुनौती

पाकिस्तान में इस बरसात से कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बहुत ही भयंकर बन गई है। यह एक बहुत ही विशाल स्तर की मानवीय त्रासदी है। अनुमान के अनुसार पाकिस्तान में इस वर्ष की बाढ़ से 1,500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 20 मिलियन के करीब लोग विस्थापित हो चुके हैं। हवाई सर्वेक्षण की तस्वीरों से पता चलता है कि जहां तक भी नजर पहुंचती है, वह क्षेत्र जलमग्न हो चुका है, पूरे देश में घाटियों के क्षेत्र से लेकर समुद्री सीमा तक, पानी भरा हुआ है। पंजाब (पाकिस्तान) के कई हिस्से भी बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने इसे धीमी गति की सुनामी की संज्ञा दी है।  यह भी सच है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए की जाने वाली सहायता की गति भी अत्यंत धीमी है। वहीं पाकिस्तान का राजनीतिक नेतृत्व भी और अधिक आर्थिक मदद की गुहार लगा रहा है। इसके लिए वह हैती में आए भूकंप और 2004 की सुनामी में की गई आर्थिक मदद की तुलना कर रहा है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी कह रहे हैं कि इस स्थिति में अनाथ हुए बच्चों को भर्ती करने का काम करके आतंकवादी संगठन सरकार को चुनौती दे सकते हैं। कुछ पाकिस्तानी टिप्पणीकारों का कहना है कि पाकिस्तान में पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था के प्रबंध नाकाफी हैं ऐसे में वे चेतावनी भी दे रहे हैं कि परमाणु शस्त्रों से लैस यह देश अराजकता की कगार पर पहुंच सकता है। जरदारी स्वयं भी इस तरह की आलोचना से घबरा गए लगते हैं और वह यूरोप की यात्रा पर निकल रहे हैं। सबसे चिंताजनक विषय उन पीडि़त करोड़ों लोगों को राहत सामग्री पहुंचाए जाने का मसला है। राहत सामग्री बांटने का काम पाकिस्तान की सेना सहित धार्मिक संगठन-मसलन लश्कर  से जुडे़ जमात-उद-दावा और तालिबानी समूह कर रहे हैं। हालांकि आपदा के समय पर मदद करने वाले को ही जनता अपना शासक समझती है, लेकिन पाकिस्तान में स्थिति यह है कि वहां सेना और राजनेताओं के बीच सही तालमेल नहीं है। इसलिए राहत पहुंचाने के लिए जनता के चुने नुमाइंदों के बजाय वहां सेना ही आगे दिख रही है। आपदा के समय पर पाकिस्तान में अन्य देशों से होने वाले खतरे का झूठा प्रचार होना भी आम बात है। उनके देश की चुनी हुई सरकारें भी जनता की मदद नहीं कर पाती है। इसलिए सेना की पैठ जनता में और भी गहरी है। भारत को इस घटनाक्रम पर भी नजर रखनी होगी और इसी आधार पर भारत-पाक रिश्तों का सिलसिला आगे बढ़ पाएगा। फिर भी प्रजातांत्रिक देश होने के नाते पाकिस्तान की यह स्थिति सही नहीं है।

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