पुराने नियमों का खामियाजा भुगत रहे कंडक्टर

नाहन। हिमाचल पथ परिवहन निगम के पुराने आर एंड पी नियमों का खामियाजा निगम के सैकड़ों परिचालकों को भुगतना पड़ रहा है। निगम के सैकड़ों कंडक्टर जहां प्रोमोशन के इंतजार में रिटायर हो चुके हैं, वहीं अभी भी निगम में सेवारत सैकड़ों कंडक्टर ऐसे हैं, जिन्हें 30 से 35 वर्ष की सेवा अवधि के बाद भी प्रोमोशन नहीं मिल रही है, जिस कारण 50 वर्ष से अधिक व इसके आसपास के उम्र दराज कंडक्टरों को भी रिटायरमेंट के आसपास के वर्षों में बसों में सवारियों के बीच धक्के खाने पड़ रहे हैं। अन्य कोई विभाग या निगम ऐसा नहीं है, जहां पदोन्नति प्राप्त करने के लिए 30 वर्ष से भी अधिक सेवा देनी पड़ती हो, लेकिन एचआरटीसी में 30 वर्ष की आयु पार कर चुके कंडक्टरों को प्रोमोशन नहीं मिल रही है। गौर हो कि पुराने आर एंड पी नियमों के चलते परिवहन निगम के कंडक्टरों को 72 प्रतिशत पदोन्नति का कोटा रखा गया है, जबकि 22 प्रतिशत प्रोमोशन कोटा ड्राइवरों के लिए तथा छह प्रतिशत पदोन्नति कोटा बुकिंग क्लर्क के लिए रखा गया है, परंतु इस पदोन्नति में भी निगम भाई-भतीजावाद अपना रहा है। इसके चलते निगम में कंडक्टरों से जूनियर ड्राइवरों को बीच में ही पदोन्नति दी जा रही है। ड्राइवरों को इंस्ट्रक्चर व यार्ड मास्टर पदोन्नत किया जा रहा है, जबकि कंडक्टर को 30 वर्ष की सर्विस के बाद भी पदोन्नति नहीं दी जा रही है। प्रदेश में निगम के कुल 23 डिपुओं में करीब 2500 कंडक्टर नियमित रूप से नौकरी कर रहे हैं। इनमें से 200 से अधिक परिचालक ऐसे हैं, जिन्हें निगम में सेवाएं देते हुए 30 वर्ष से अधिक का समय हो चुका है। प्रदेश इकाई के चालक परिचालक संघ के अतिरिक्त महासचिव सुखराम ठाकुर का कहना है कि परिचालकों की पदोन्नति का मामला बीते माह भी परिवहन मंत्री के समक्ष उठाया जा चुका है। संघ इस मामले को पुनः सरकार के समक्ष उठाएगा। परिचालकों को सेवा के 25 से 30 साल पूरा होने पर भी प्रोमोशन नहीं मिल रही है। उधर, प्रबंधक निदेशक एचआरटीसी भरत खेड़ा ने कहा कि निगम में सभी प्रकार की पदोन्नति सरकार द्वारा निर्धारित आर एंड पी नियम के तहत होती है। परिचालकों की पदोन्नति भी नियम के अनुसार हो रही है।

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