प्रवासियों को बांटी 50 हजार बीघा भूमि

दिव्य हिमाचल ब्यूरो, बिलासपुर

हिमाचल किसान मंच के मुख्य संयोजक केके कौशल व प्रवक्ता केश पठानिया ने कहा कि भाजपा व कांग्रेस सरकारों ने प्रदेश की महत्त्वपूर्ण भूमि पूंजीपतियों, उद्योगपतियों, विभिन्न हाइडल व सीमेंट प्रोजेक्ट के लिए अलॉट कर लोगों के हितों पर कुठाराघात किया है। अब तक दोनों ही पार्टियों ने प्रदेश की तकरीबन 50 हजार से ज्यादा बीघा भूमि प्रोजेक्टों व उद्योगपतियों को सौंप दी है। यह भूमि कम भूमि वाले किसानों व भूमिहीन लोगों को मिलनी थी, लेकिन सरकार ने इसे प्रदेश के जरूरतमंद लोगों को देने के बजाय बाहरी लोगों को बांट दिया है। इसके अलावा मंच को आशंका है कि यहां लग रहे प्रोजेक्टों से सरकार मोटी कमीशन वसूल रही है। लिहाजा इस मसले की सीबीआई से जांच करवाए जाने की मांग उठाई है। पत्रकार वार्ता में केके कौशल व केश पठानिया ने कहा कि विधानसभा में राजस्व मंत्री ने जवाब दिया है कि प्रदेश में 409 मामलों में सरकार ने 118 की अनुमति देकर बाहरी उद्यमियों को भूमि का मालिक बनाया है। यह भूमि सात हजार से ज्यादा बीघा बनती है, जबकि यह भूमि जरूरतमंद किसानों व भूमिहीन लोगों को मिलनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि विधानसभा में यह भी जवाब दिया गया है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अढ़ाई हजार से ज्यादा मामलों में 118 की परमिशन देकर करीब 43 हजार बीघा भूमि बाहरी लोगों को अलॉट की गई थी और भाजपा सरकार के कार्यकाल में सात हजार से ज्यादा भूमि बाहरी लोगों के नाम हुई है। मंच नेताओं के अनुसार दोनों ही सरकारें प्रदेश के लोगों के हित में कार्य नहीं कर रहीं। सरकार को चाहिए था कि प्रदेश का सर्वे करवाकर पता लगाया जाता है कि कितने लोगों के पास पांच बीघा जमीन है, कितने भूमिहीन और भाखड़ा व पौंग डैम विस्थापितों को कितनी जमीन दी जा सकती है, लेकिन किसी भी सरकार ने ऐसा नहीं किया, यदि ऐसी नीति बनाई होती, तो आज शहर में नाजायज कब्जों को उजाड़ने के लिए हाई कोर्ट के आदेश न होते। प्रदेश के नेताओं से सवाल उठाया कि वे बताएं जब बाहरी लोगों को धड़ाधड़ भूमि बांटी जा रही है, तो प्रदेश के लोगों को जमीन कहां से देंग

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