प्रोमोशन पर सहायक प्रोफेसर तल्ख

 सोलन। यूजीसी ने भले ही प्रोफेसर पद सृजित करने की अनुमति दे दी हो, लेकिन प्रदेश के हजारों सहायक प्रोफेसर काफी अरसे से सरकार की अधिसचूना का इंतजार कर रहे हैं। प्रदेश राजकीय महाविद्यालय शिक्षक महासंघ ने राजनीतिक मंच व ज्ञापन के माध्यम से कई बार यह मामला उठाया, लेकिन प्रदेश सरकार ने सहायक प्रोफेसर की प्रदोन्नति पर अभी तक कोई विचार नहीं किया है। महाविद्यालय शिक्षक संघ अब सरकार पर दबाव बनाने के लिए आगामी रणनीति तैयार में जुट गया है। शिक्षक संघ के प्रदेश सचिव प्रमोद चौहान का कहना है कि वर्ष 2009 में यूजीसी ने प्रदेश के सभी कालेजों में प्रोफेसर पद के लिए मान्यता प्रदान कर दी थी, लेकिन प्रदेश सरकार ने इस संबंध में अभी तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की है, जिसके कारण प्रदेश के सैकड़ों सहायक प्रोफेसरों की पदोन्नतियां रुकी हुई हैं। इसके अलावा विभागीय पदोन्नति कमेटी की बैठक भी काफी अरसे से नहीं हो पाई है। संघ ने मांग की है कि पदोन्नति कमेटी वर्ष में कम से कम दो बार आयोजित की जानी अनिवार्य की जाए। प्रमोद चौहान ने कहा कि असिस्टेंट प्रोफेसर की पदोन्नति की समय सीमा समाप्त हो चुकी है, लेकिन विभागीय पदोन्नति कमेटी की बैठक न होने के कारण प्रोमोशन नहीं हो पा रही है। प्रमोद चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा कर्मचारियों के भत्ते वर्ष 2006 के वेतनमान के साथ रिवाइज नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आवासीय भत्ता व चिकित्सा भत्ता रिवाइज किया जाना चाहिए। इसी प्रकार शिक्षकों के लिए प्रदेश के सभी कालेजों में आवास की सुविधा की मांग भी काफी अरसे से चली आ रही है, लेकिन अभी तक प्रदेश के किसी भी कालेज में आवास की सुविधा प्रदान नहीं की गई है। श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश विवि की कार्यकारी परिषद के लिए हिमाचल के कालेज से एक सदस्य नियुक्त किया जाता है, लेकिन पिछले  काफी समय से यह चुनाव ही नहीं हुए हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि इन सभी मांगों पर तुरंत कार्रवाई की जाए अन्यथा संघ को आगामी रणनीति बनानी होगी। कई बार प्रदेश सरकार के समक्ष इन मांगों को रखा जा चुका है, लेकिन अभी तक इस मामले पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।

You might also like