फाइलें ढोने में 11 लाख गर्क

नई दिल्ली। लंबे समय तक रेल मंत्री ममता बनर्जी की रेल मंत्रालय में अनुपस्थिति के कारण उनके पास फाइलें पहुंचाने में एक साल से अधिक समय में सरकारी कोष के 11 लाख रुपए स्वाहा हो चुके हैं। फाइलों को मंजूरी दिलाने के लिए ममता के पास ले जाने में पांच अधिकारियों की दिल्ली और कोलकाता के बीच भाग-दौड़ पर रेलवे के 11,23,550 रुपए खर्च हुए हैं। ये पांच अधिकारी रेल मंत्री के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी गौतम सान्याल, निजी सचिव शांतनु बसु, कार्यकारी निदेशक (सार्वजनिक शिकायत) जेके साहा, अतिरिक्त निजी सचिव एस अशोक और एपीएस रतन मुखर्जी हैं। साहा और मुखर्जी की हवाई यात्राओं का किराया रेलवे नहीं दे सकती, लेकिन अन्य तीन अधिकारियों के विमान से पहली जुलाई, 2009 से 30 जून, 2010 तक कोलकाता जाने और वापस आने पर 8,73,964 रुपए खर्च हुए। सूचना का अधिकार के तहत दिए गए एक जवाब में बताया गया है कि इसके अलावा रेलवे को पांचों अधिकारियों को इसी अवधि में ममता से मिलने के लिए कोलकाता जाने पर 2,49,604 रुपए की राशि टीए-डीए के तौर पर देनी पड़ी। आरटीआई कार्यकर्ता एससी अग्रवाल ने ममता बनर्जी से मिलने जाने वाले अधिकारियों और फाइलों को दिल्ली कोलकाता लाने ले जाने के खर्च का ब्यौरा मांगा था। विपक्ष ममता पर रेल मंत्रालय के बजाय अपने गृह राज्य पश्चिम बंगाल पर अधिक ध्यान देने का आरोप लगाता रहा है। बहरहाल ममता ने पिछले सप्ताह संसद में कहा कि दिल्ली में उनकी गैर मौजूदगी का उनके मंत्रालय के कामकाज पर असर नहीं पड़ा है। उनका कहना है कि उनके मंत्रालय का प्रदर्शन पिछले 50 वर्षों में शानदार रहा है।

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