फाइलों में दफन मिनी सचिवालय

 सोलन। सोलन में मिनी सचिवालय के नाम पर कई वर्ष राजनीति तो होती रही, लेकिन यह योजना आज तक सिरे नहीं चढ़ पाई है।

हालांकि पूर्व कांग्रेस सरकार के दौरान मालरोड पर मिनी सचिवालय बनाए जाने के लिए स्थान भी चयनित कर लिया गया था, लेकिन सरकार बदलते ही यह योजना फाइलों में दफन हो गई। वर्तमान में आलम यह है कि जनता से जुड़े हुए कई महत्त्वपूर्ण सरकारी विभाग शहर की गली-मोहल्लों में चल रहे हैं। लोगों को अपने निजी कार्य के लिए शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में दौड़ना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार सोलन शहर में मिनी सचिवालय की मांग काफी अरसे से रही है। हालत यह है कि कई सरकारी विभाग शहर के निजी भवनों में चल रहे हैं। जनता से जुड़ा हुआ सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग राजगढ़ मार्ग पर स्थित एक तंग गली में कई वर्षों से चल रहा है।

इसी भवन की नीचे वाली मंजिल में  जिला कल्याण अधिकारी का कार्यालय है। यह दोनों भवन कई वर्षों से निजी भवन में चल रहे हैं। इसी प्रकार उद्योग विभाग का कार्यालय चंबाघाट में है और इसी भवन की निचली मंजिल में खनन अधिकारी भी बैठता है, जबकि शिक्षा उपनिदेशक का कार्यालय भी चंबाघाट में ही एक अलग स्थान पर स्थित है। बीडीओ सोलन का कार्यालय सपरून बाइपास पर स्थित एक तंग गली में चल रहा है। आबकारी एवं कराधान विभाग का कार्यालय भी बीडीओ कार्यालय से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आयकर विभाग का कार्यालय, तो सोलन से करीब  पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। लोक निर्माण विभाग का एक कार्यालय पुरानी कचहरी में है, तो दूसरा कार्यालय नए बस स्टैंड के समीप खोला गया है। परिवहन निगम के कार्यालय भी चंबाघाट स्थित एचआरटीसी कार्यशाला में ही चल रहा है, वहीं पर्यटन विभाग का क्षेत्रीय कार्यालय भी मोहन पार्क के समीप पुराने भवन में चल रहा है, जबकि आरटीओ कार्यालय के पास तो अपना भवन ही नहीं है। यह कार्यालय भी सब्जी मंडी के एक कमरे से  चल रहा है। ऐसे  कई सरकारी कार्यालय ऐसे हैं, जो सोलन शहर व आसपास के क्षेत्रों में खोले गए है। इससे लोगों को कार्यालय खोजने में दिक्कत उठानी पड़ती है।

लोगों की इस समस्या को मद्देनजर रखते हुए पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान मिनी सचिवालय बनाए जाने की दिशा में प्रयास शुरू किया गया था।, लेकिन यह योजना भी फाइलों में दफन होकर रह गई, वहीं उपायुक्त अमर सिंह राठौर का कहना है कि मिनी सचिवालय की कोई भी योजना फिलहाल नहीं है और न ही दिशा में कोई प्रयास किया जा रहा है।

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