बंजार के अनार पर काले धब्बों का साया

उपमंडल संवाददाता, बंजार

मुख्यालय के सेबों व अन्य फलों  में लगने वाले रोगों को उपमंडल के  बागबानों ने जैसे-तैसे कंट्रोल कर लिया है, परंतु अब रोग का कहर नकदी फसल अनार के दानों पर भी होने लगा है। जिसके चलते बंजार के दर्जनों अनार उत्पादन काफी चिंतित हैं। उपमंडल के अनार उत्पादक सुनील, जितेंद्र, सुखराम व आशू ने बताया कि उनका क्षेत्र सेब के पेड़ों के लिए काफी सफल नहीं रहा, इसलिए उपमंडल के दर्जनों बागबानों ने अपने सेब के पेड़ों को काटकर उनकी जगह अनार के पेड़ लगाए थे, परंतु अब तीन-चार साल बाद उपमंडल के अनारों के फलों पर काले धब्बे पड़ने का एक अनोखा रोग पनप गया है। उसे काले धब्बे के अंदर ही एक कीड़ा उत्पन्न हो जाता है, वह पूरे अनार के दाने को अंदर से ही सड़ा देता है। उक्त अनार उत्पादकों का कहना है कि यदि ऐसे ही रोग नकदी फसलों पर लगता रहा, तो हम लोगों को काफी नुकसान का सामना  करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रोग अनार के फलों पर मौसम व तापमान के उतार-चढ़ाव के चलते पनप रहा है। कुछ बुद्धिजीवियों का कहना है कि इस रोग को पहले चरण में कंट्रोल कर सकते हैं तथा जब इसका प्रकोप ज्यादा बढ़ जाता है, फिर इसे कंट्रोल नहीं किया जा सकता।

विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। बागबानों का कहना है कि काले धब्बे आने पर बागबानों को काफी नुकसान से गुजरना पड़ता है।

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