बंदरों का आतंक अब संसद में

कार्यालय संवाददाता, शिमला

किसानों की खेती उजाड़ने वाले बंदरों का आतंक संसद में गूंज चुका है। इनके आतंक से परेशान किसानों द्वारा छोड़ी जा रही खेती की गंभीर समस्या को भाजपा के सांसद वीरेंद्र कश्यप ने संसद में उठाया है। हिमाचली किसानों की व्यथा का हल निकालने के लिए उन्होंने  शुक्रवार को केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री डा.सीपी जोशी से मुलाकात की और अपनी मांगें रखीं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से मांग की है कि बंदरों के आतंक से छुटकारा दिलाने के लिए बंदरों के एक्सपोर्ट का विकल्प खोल दिया जाए, क्योंकि प्रदेश सरकार के भरसक प्रयासों के बाद भी यहां बंदरों की समस्या समाप्त नहीं हो पा रही है। उन्होंने किसानों की पीड़ा को बयां करते हुए मनरेगा से धन देने की मांग की है। भाजपा सांसद वीरेंद्र कश्यप ने कहा कि यदि किसानों को रखवाला बनाकर उन्हें अपनी फसल बचाने के लिए 100 दिन का पारिश्रमिक दिया जाए, तो किसान फसलों की रक्षा का काम कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि 50 फीसदी से ज्यादा किसान इनके आतंक के कारण खेती छोड़ चुके हैं जो बेहद चिंता की बात है।

साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से लोगों को फायर वाचर का काम सौंपने की बात भी कही है। उन्होंने कहा कि गर्मियों में जंगलों को आग से बचाने के लिए फायर वाचर लगाए जाएं और इनकी दिहाड़ी भी मनरेगा के अधीन ही दी जाए। इससे वनों की रक्षा हो सकेगी। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के लिए यह व्यवस्था खासतौर पर करने की बात कही है। केंद्रीय मंत्री को दिए गए एक पत्र में उन्होंने कहा है कि यह मसला उन्होंने लोकसभा में भी उठाया था, जिसमें इन कार्यक्रमों को मनरेगा में शामिल करने की मांग की गई थी। श्री कश्यप ने बताया कि लोकसभा में मामला उठाने के बाद केंद्रीय मंत्री ने उन्हें मुलाकात में हर सहायता देने का भरोसा दिलाया है।

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