बरसात ने बागबानों की मेहनत पर फेरा पानी

कार्यालय संवाददाता, पतलीकूहल

पिछले चार महीनों से जिस तरह बारिश हो रही है, उसने कुल्लू घाटी की मुख्य फसल सेब के लिए बागबानों को असमंजता की डगर पर लाकर खड़ा कर दिया है। सेब सीजन के आरंभ से ही बरप रहा मौसम का कहर इस कद्र रौद्र रूप अख्तियार किए हुए है कि वर्ष भर की कमाई की मलाई बागबानों के हाथ से फिसलकर रह गई है। वहीं दूसरी ओर एशिया की सबसे बड़ी सब्जी मंडी आजादपुर में कुंडली बार्डर पर ट्रक की लंबी कतारें कई दिनों तक लगी रहने से बागबानों की मेहनत सेब की पेटियों से पानी बहकर रिस रही है। वहीं दूसरी ओर कश्मीर से चलने वाला सेब भी विशेषकर कुल्लू के सेब पर भारी पड़ने वाला है।

हर वर्ष जैसे ही कश्मीर से सेब का सीजन शुरू होता है, तो इसका सीधा असर कुल्लू के सेब पर पड़ता है। इस वर्ष देशभर में सेब का उत्पादन गत वर्ष से दो से तीन गुना है। उस सूरत में बागबानों को अपनी फसल की चिंता होना स्वाभाविक बात है। मौसम का रौद्र मिजाज जिस तरह से बागबानों के अरमानों को धो रहा है, उससे बागबानों को घाटे की दस्तक उजागर होने लगी है। अभी तक बी-ग्रेड सेब का कारोबार करने वालों ने उत्साह से सेब की खरीद को हाथ बढ़ाए हैं, उनके हाथ अब बरसात  की बिसात के चलते पीछे हैं। कुल्लू में कई वर्षों से सेब का कारोबार करने वाले मंडी निवासी मनीराम ने बताया कि आरंभ में बी-ग्रेड के दाम पंजाब-हरियाणा के सब्जी मंडियों में बढि़या दाम मिल रहे थे, मगर इन राज्यों में बाढ़ के प्रकोप ने उनकी मंशा पर पानी फेर दिया है।

खरीददार मनीराम ने बताया कि अभी तक जिन बागबानों से वह जिस कीमत पर सेब को खरीदता रहा है, अब मैदानी क्षेत्रों में भारी बरसात के चलते इसके दामों में भारी कमी आई है। जिससे खरीद की गई फसल में गाडि़यों का भाड़ा भी पूरा नहीं होने लगा है, वहीं दूसरी ओर घाटी के बागबान ख्याली राम, शेर सिंह, अमर चंद इत्यादि ने बताया कि जिस तरह से बरसात का कहर जारी है, उससे दूर-दराज के क्षेत्रों के संपर्क मार्ग भारी भू-स्खलन व ल्हासे गिरने के कारण अवरुद्ध हो गए हैं।

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