बरसात ने रोका सेब तुड़ान

शिमला। करोड़ों के सेब पर बरसात का खतरा मंडरा रहा है। बरसात के कारण बागबान सेब तुड़ान नहीं कर पा रहे हैं या फिर संपर्क मार्ग खस्ता होने से सेब को मंडियों तक पहंुचाना मुश्किल हो गया है। करीब डेढ़ माह से हो रही बारिश बागबानों को रुलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। बागबान मौसम साफ होने के इंतजार में टकटकी लगाए बैठे हैं। प्रदेश के सात लाख से अधिक परिवारों की आर्थिकी बागबानी पर निर्भर है। इन परिवारों को साल भर की रोटी सेब से मिलती है। ऐसे में सेब की तैयार फसल बागीचों में सड़ती देख बागबान चिंता में हैं। बरसात के कारण सेब तुड़ान कर पाना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। यदि बागबान सेब तुड़ान कर रहे हैं, तो उन्हंे ग्रेडिंग, पैकेजिंग व ढुलाई में कठिनाइयां आ रही हैं। बागबानों की दिक्कतें यही खत्म नहीं होती। ऊपरी शिमला में कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां गांवों को जोड़ने वाले सड़क संपर्क मार्ग बरसात ने ध्वस्त कर दिए हैं। कुछ बागबान मेहनत करके सड़कों की हालत सुधार देते हैं, लेकिन बरसात फिर से सड़कों का वहीं हश्र कर देती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक बरसात के कहर अभी ओर 23 दिनों तक बागबानों को रुलाता रहेगा। उल्लेखनीय रहेगा कि आने वाले दिनों में बारिश का यह क्रम नहीं थमता,तो निश्चित रूप से बागबानों को और भी परेशानियां उठानी पड़ेंगी और करोड़ों का सेब बागीचों में ही सड़ जाएगा। रोहड़ू के शरौंथा निवासी चैतन चौहान ने कहा कि क्षेत्र में बारिश के कारण आधा दर्जन सड़क संपर्क मार्ग ठप पड़े हैं। ऊपरी शिमला के नंगलदेवी-धमांदरी, चियोग-सैंज, मत्याना-नागजुब्बड़ मार्ग के अलावा आधा दर्जन से अधिक सड़क संपर्क मार्ग ठप पड़े हैं, जिससे फसल को मुख्य सड़कों तक पहंुचाना मुश्किल हो गया है। मत्याना के ननी निवासी अनिल कुमार व रतिराम वर्मा ने बताया कि मौसम खुलने पर बागबान सड़कों की हालत सुधार लेते हैं, लेकिन रोज-रोज की बारिश फिर से सड़कों को नष्ट कर देती है। उन्होंने कहा कि इस बार सेब की बंपर फसल से बागबानों के चेहरे पर रौनक थी, लेकिन बरसात, सड़कों की खस्ताहालत, मजदूरों की कमी, किराया अधिक होने तथा पैकेजिंग सामग्री के महंगा होने से बागबानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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