बहनों ने सजाई भाइयों की कलाई

स्टाफ रिपोर्टर, बिलासपुर

भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार जिला भर में बड़ी धूमधाम से मनाया गया। बहनांे ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध इस पवित्र रिश्ते की रस्म को निभाया। रंग-बिरंगे परिधानों में सजी नन्ही बच्चियों मंे रक्षाबंधन के प्रति काफी उत्साह देखने को मिला। बहना से राखी बंधवाने के बाद भाइयों ने अपनी नन्ही बहनों को गिफ्ट के रूप में चॉकलेट या लालीपॉप देकर अपने प्यार की सौगात दी। मंगलवार सुबह से ही रक्षाबंधन के पवित्र त्योहार को लेकर बाजार में काफी चहल-पहल रही। नए-नए कपड़ों में सज-संवर कर बहनों ने भाइयों की कलाई पर अपने रिश्ते की डोर को बांध कर उनसे अपनी सुरक्षा का वचन लिया। उधर, हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसों मंे महिलाओं ने सफर कर निःशुल्क बस यात्रा का फायदा भी उठाया।

राखी के त्योहार को लेकर सुबह से ही माहौल काफी रंगीन रहा। बहनों के चेहरों पर इस पर्व को लेकर खुशी साफ झलक रही थी। कुछ बहनों ने तो साफ तौर पर कहा कि आज का दिन तो भाइयों की जेब पर डाका डालने का है, क्योंकि यही वह दिन है जब वे अपने भाई से किसी भी चीज की मांग बेहिचक कर सकती हैं। उधर, भाई भी अपनी बहनों की हर मांग को पूरा करने को तैयार दिखे। शहर के डियारा सेक्टर के निवासी अश्वनी शर्मा, रवि शर्मा, विनोद गुप्ता, संजय ठाकुर, जसजीत वालिया, सुरेंद्र गुप्ता व राहुल ने कहा कि आज के दिन बहनों की हर मांग जायज है, इस दिन वे उनसे कोई भी बात मनवा सकती हैं।

फिर चाहे बात नए कपड़ों की हो या फिर नकद राशि की। इन भाइयों ने कहा कि रक्षाबंधन के दिन का वे भी बेसब्री से इंतजार करते हैं। रक्षाबंधन के त्योहार को लेकर बाजार में खूब चहल-पहल रही। विभिन्न रंगों व सुगंधित कर देने वाली राखियों के साथ ही मिठाइयों की दुकानों पर भी खासी भीड़ रही। मिठाई विक्रेताओं का कहना था, पिछली बार की तुलना में इस बार व्यापार अच्छा रहा। हालांकि कुछ लोगों ने मिठाई के बदले ड्र्र्र्राई फ्रूट को थोड़ा ज्यादा अधिमान दिया, लेकिन इसके बावजूद मिठाई की बिक्री ठीक रही।

इस दिन बहने अपने भाइयों को मिठाई खिलाकर ही उनकी कलाई पर राखी बंाधती हैं, पर बदलते परिवेश में अब धीरे-धीरे मिठाई की जगह ड्राई फ्रूट ने ले ली है। उधर, रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं ने पथ परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क बस यात्रा का जमकर आनंद उठाया। सरकारी बसें महिलाओं से भरी पड़ी थीं। आलम यह था कई महिलाओं को बैठने तक के लिए जगह नहीं बची थी। कुल मिलाकर महंगाई के इस दौर में भी रिश्ते की डोर का महत्त्व ज्यादा रहा।

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