बादल देख फटा थर्माण का कलेजा

कुल्लू। आसमान में बादल देख थर्माण का कलेजा फट गया। बादल फटने से मिले जख्म लगातार रिसते जा रहे हैं। अब बरसात के चलते आसमान में उमड़ते-घुमड़ते से काले बादलों को देखकर ही थर्माण के बाशिंदों सहित जिलावासी भी खौफ में हैं। लोगों को भय सता रहा है कि अभी तो बरसात आधी ही हुई है और अब आगे न जाने क्या होगा। वहीं मौसम विभाग के पूर्वानुमान से भी लोग आतंकित हैं। मौसम विभाग की मानें तो मानसून अभी 20 सितंबर तक सक्रिय रहेगा। ऐसे में अभी एक महीना और है। बरसात के रुख को देखते हुए लोग डर रहे हैं कि जिला में इस सीजन के चलते चार बार बादल फटने की घटना हो चुकी है, जिसमें करोड़ों रुपए की संपत्ति पानी की भेंट चढ़ गई। बादल फटने के बाद मंगलवार को थर्माण में दहशत व मातम का माहौल रहा। लोग मलबे के ढेर में सामान तलाशते रहे।  इस साल जुलाई अगस्त में अभी तक 22 जून को बरशैणी के जगराईं नाला में बादल फटने से परियोजना को लाखों का नुकसान हो चुका है। इसके बाद 15 जुलाई को काईस में  आसमानी कहर से मकान क्षतिग्रस्त हुए थे। वहीं 21 जुलाई को फिर से बादल फटने के कारण धुंधी में रोहतांग टनल की  निर्माण सामग्री बह गई थी। इसके बाद अब 23 अगस्त को थर्माण में बरसे आसमानी कहर से लोग सहम गए हैं। सोमवार को बरसे कहर के कारण दो घंटे के भीतर ही 91 लाख के लगभग की संपत्ति मलबे में दफन हो गई थी। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान लोगों की निजी संपत्ति को पहुंचा है। वहीं आईपीएच विभाग की भी लगभग डेढ़ लाख की पाइपें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। यही नहीं कृषि उपज समिति लाहुल-स्पीति द्वारा रामशिला से थर्माण तक बनाया गया संपर्क सड़क मार्ग भी पूरी तरह से धुल गया है। बादल फटने से नाले में आई बाढ़ के कारण  स्थानीय निवासी अनूप राम व रविंद्र नाथ की दुकानें भी जमींदोज हो गईं हैं। बहरहाल घटना की सूचना मिलने के बाद जिलाधीश बीएम नांटा ने घटनास्थल का दौरा कर वस्तुस्थिति का जायजा ले लिया है। अब प्रशासन नुकसान की रिपोर्ट बनाने में जुट गया है। वहीं बादल फटने से खौफजदा लोग अब आसमान में उमड़ते-घुमड़ते काले बादलों को देखकर भी सहम उठे हैं।

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