भाजपा नेता व धूमल के रिश्तेदार की हादसे में मौत

ऊना। हरोली भाजपा मंडलाध्यक्ष जगरूप सिंह और बीबीएमबी के कनिष्ठ अभियंता सुरेंद्र मोहन की सड़क हादसे में मौत हो गई। बीबीएमबी में कार्यरत सुरेंद्र मोहन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के करीबी रिश्तेदार थे, जबकि जगरूप सिंह ने संतोषगढ़ विधानसभा क्षेत्र से मुकेश अग्निहोत्री के खिलाफ चुनाव लड़ा था। शिमला में भाजपा बैठक से लौटते समय आनंदपुर के समीप यह दर्दनाक हादसा पेश आया। आनंदपुर पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है। जानकारी के अनुसार शिमला में पदाधिकारियों की बैठक के बाद भाजपा नेता ऊना वापस आ रहे थे। आंनदपुर के नजदीक उनकी कार (एचपी 20 बी-5151) मुख्य राष्ट्रीय मार्ग के किनारे पर अनियंत्रित होकर एक शीशम के पेड़ से टकरा गई, जिसमें कार के अगली सीट पर बैठे जगरूप सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कार चला रहे सुरेंद्र मोहन ने आनंदपुर साहिब अस्पताल में दम तोड़ दिया। माना जाता है कि सुरेंद्र को नींद की झपकी आने से यह हादसा हुआ। भाजपा नेता की मृत्यु से जिला ऊना में शोक की लहर है। उनके अंतिम संस्कार में सांसद अनुराग भी पहुंचे थे। अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री ने श्मशानघाट तक रास्ता पक्का करने के आदेश दिए। रविवार सुबह करीब छह बजे ऊना से सीपीएस सतपाल सिंह सत्ती, वीरेंद्र कंवर, विधायक व जिला भाजपाध्यक्ष बलवीर चौधरी, नंगल विधानसभा क्षेत्र से विधायक राणा केपी, जिला परिषद अध्यक्ष बलवीर बग्गा, जिला भाजपा मीडिया प्रभारी हरिओम भनोट अस्पताल में पहुंचे। इसके अलावा मंडी समिति अध्यक्ष कै. मंगतराम शर्मा, चौधरी मक्खन सिंह, हरोली बीडीसी अध्यक्ष शेर सिंह, यशपाल राणा, हरोली भाजपा महासचिव बुद्ध प्रकाश, जिप सदस्य जगजीत मनकोटिया, कर्नल तरसेम जसवाल व हेमराज गौतम आदि आनंदपुर साहिब पहंुचे। वहीं ऊना के उपायुक्त केआर भारती ने डीसी रोपड़ व एसडीएम नंगल को हादसे की जानकारी देकर आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। जगरूप सिंह अपने पीछे वृद्ध पिता, पत्नी व बेटा छोड़ गए हैं। जगरूप सिंह ने जीवन में कई मुकाम हासिल किए। बचपन से खेलों में अव्वल रहने वाले जगरूप ने कालेज में छात्र राजनीति में कदम रखा तथा संघ अध्यक्ष बने। इसके बाद वह एनएसयूआई, युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष भी बने। जगरूप सिंह ने पंचायत समिति के सदस्य के रूप में राजनीति का सफर शुरू किया, वहीं वह सलोह वार्ड से जिला परिषद सदस्य भी बने। कांग्रेस के सक्रिय नेता के रूप में संतोषगढ़ में वह पीसीसी सदस्य बने तथा 2003 के विधानसभा चुनावों में स्टोक्स खेमे से जोड़ते हुए उन्हें कांग्रेस टिकट से वंचित कर दिया गया, जिसके बाद जगरूप सिंह ने आजाद प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रह कर दस हजार से अधिक मत प्राप्त किए। इसके बाद वह मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में विश्वास जताते हुए भाजपा में शामिल हुए। हाल ही में जगरूप सिंह को हरोली भाजपा मंडलाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया था।

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