भारतीय सेना में हिमाचल की अनदेखी क्यों?

देश के हर बड़े राज्य के नाम पर उस राज्य की रेजिमेंट है। जब सभी राज्यों को अपनी रेजिमेंट हैं, तो हिमाचल की क्यों नहीं। हिमाचल की फौज में भर्ती का कोटा भी कम कर दिया है। यह फैसला तर्कहीन है इस पर भी गौर करने की जरूरत है…

हिमाचल सरकार कई बार गुहार लगा चुकी है कि हिमाचल को हिमाचल रेजिमेंट मिलनी चाहिए, लेकिन इस मुद्दे पर न कभी हां मिली और न ही कभी न मिली। कुछ महीने पहले फौज के चीफ साहब जब शिमला दौरे पर थे और उन्होंने हिमाचल के मुख्यमंत्री महोदय से मुलाकात की थी, तब भी माननीय मुख्यमंत्री महोदय ने यह मुद्दा उनसे भी उठाया था। हिमाचल के शूरवीरों के कारनामे किसी भारतीय से छिपे नहीं हैं। बहुत पीछे न जाते हुए मैं यह बताना चाहता हूं कि कारगिल में हिमाचल के 55 शूरवीरों ने अपने खून से इस धरती को सींचा है। जीवित परमवीर चक्र विजेताओं में हिमाचल के बिलासपुर का वीर संजय आज भी फौज में सेवारत है। मैं यहां पर कुछ आंकड़े रेजिमेंटों बारे दे रहा हूं, ताकि हिमाचल की हिमाचल रेजिमेंट बारे स्थिति साफ हो जाए। देश के हर बड़े राज्य के नाम पर उस राज्य की रेजिमेंट है।

जम्मू-कश्मीर ः इस राज्य की अपनी तीन रेजिमेंट हैं। जम्मू कश्मीर रायफल्स रेजिमेंट, जम्मू-कश्मीर लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट तथा लद्दाख स्काउट्स। लद्दाख स्काउट्स बारे भ्रम है कि यह फौज नहीं, बल्कि अर्द्ध सैनिक बल है, जो कि गलत है। लद्दाख स्काउट्स मुकम्मल तौर पर फौज की रेजिमेंट है और इसकी सात पलटने हैं।

पंजाब ः इस प्रांत की तीन रेजिमेंट्स हैं। पंजाब रेजिमेंट, सिख रेजिमेंट तथा सिख लाइट इन्फेंट्री

हरियाणा ः हरियाणा प्रांत की जाट रेजिमेंट है।

राजस्थान ः इस प्रांत की दो रेजिमेंट्स हैं। पहली राजपूत रेजिमेंट और दूसरी राज रायफल्स।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड ः इन प्रांतों की कुमाऊं रेजीमेंट है। उत्तराखंड पहले उत्तर प्रदेश का ही हिस्सा था।

बिहार ः इस प्रांत की बिहार रेजिमेंट है।

पश्चिम बंगाल ः इंजीनियर्स में बंगाल इंजीनियर्स पश्चिम बंगाल की है।

आसाम ः इस राज्य की आसाम रेजीमेंट है। एक अर्द्ध सैनिक बल आसाम रायफल्स है, जिसमें सभी पूर्व-उत्तरी राज्यों के जवान कार्यरत हैं। अर्द्ध सैनिक बल पूरी तौर पर फौज ही होता है, लेकिन इन पर होम मिनिस्ट्री का कंट्रोल होता है।

नागालैंड ः इस राज्य की नागा रेजिमेंट है।

मध्य भारत के सभी प्रदेश ः इनकी महार रेजिमेंट है।

तमिलनाड़ु ः इस प्रदेश की मद्रास रेजिमेंट है।

महाराष्ट्र ः इस राज्य की मराठा लाइट इन्फेंट्री है।

सिक्किम, बंगाल तथा जहां-जहां गोरखा लोग रहते हैं, वहां की गोरखा रेजिमेंट है।

डोगरा रेजिमेंट एक ऐसी रेजिमेंट है, जिसमें हिमाचल, जम्मू-कश्मीर तथा पंजाब के नौजवान कार्यरत हैं। सही मायनों में डोगरा उस जवान को कहते हैं, जो डोगरा प्रदेश का हो और डोगरा प्रदेश सिर्फ जम्मू को ही कहा जाता है। इसी तरह गे्रनेडियर रेजिमेंट एक ऐसी रेजिमेंट है, जिसमें राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश व कुछ हिमाचल के नौजवान कार्यरत हैं।

इस तरह स्थिति बड़ी साफ है कि जब सभी राज्यों की अपनी रेजिमेंट हैं, तो हिमाचल की क्यों नहीं। कोई यह कहे कि चंडीगढ़, सिक्किम, मिजोरम, त्रिपुरा मणिपुर, गोवा, दमन दीव या दिल्ली की रेजीमेंट नहीं है, तो उसका जवाब वहां की जनसंख्या है। वहां की जनसंख्या रेजिमेंट खड़ी करने के लिए कम है। आज सभी रेजिमेंट में 20-20 यूनिटें हैं, हां नागा रेजिमेंट और लद्दाख स्काउट्स की इससे कम हैं। भारत सरकार पता नहीं हिमाचल की इस मांग पर क्यों गौर नहीं कर रही है। यह मांग बहुत सोच समझ कर की गई है और मानने योग्य है। हिमाचली युवक-डोगरा रेजिमेंट, पंजाब रेजिमेंट, जम्मू-कश्मीर रायफल रेजिमेंट में मुख्य तौर पर कार्यरत हैं। फख्र होता है अपने असली घर पर, अपने गांव पर और अपने राज्य पर। देश पर फख्र करना गर्व की बात है, लेकिन प्रदेश का पहले आना स्वाभाविक है। अगर यह कहा जाए कि अमुक राज्य के युवक फौज में आना पसंद नहीं करते हैं, तो अच्छी बात नहीं लगेगी, लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि हिमाचल का हर युवक (बहुत कम संख्या को छोड़कर) फौज में आने का इच्छुक है। युवकों की इच्छा पूरी नहीं हो रही है। हिमाचल के युवकों के बुजुर्ग फौज में ही कार्यरत थे, उन्हें फौज में काम करने की इच्छा विरासत में मिली है। दूसरे हिमाचल की फौज में भर्ती का कोटा भी कम कर दिया है। यह फैसला तर्कहीन है इस पर भी गौर करने की जरूरत है

जसवंत सिंह चंदेल

लेखक, कलोल, बिलासपुर से सेवानिवृत कर्नल हैं

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