मंडी में बहुत आगे निकल गई ब्रिगेड

अजय कुमार, मंडी

छात्र संघ चुनावों में मंडी जिला में एक बार फिर भगवे ने सात कालेजों में बाजी मारी है। बीते वर्ष के मुकाबले हालांकि एबीवीपी को एक कालेज का नुकसान हुआ है और एसएफआई जहां बीते वर्ष जिला में अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी, इस वर्ष उसके खाते में चार पद चले गए हैं। जिला में वल्लभ,धर्मपुर और करसोग के कालेज एबीवीपी का गढ़ बनकर उभरे हैं। वल्लभ कालेज में एबीवीपी ने लगातार सातवीं मर्तबा जीत हासिल कर एनएसयूआई को हाशिए पर धकेल दिया है। जिला में हुए चुनावों के दौरान एबीवीपी के हिस्से कुल 32 पद आए हैं।

एनएसयूआई 12 पर ही जीत हासिल कर सकी है, जबकि एसएफआई चार सीटों पर सिमट गई है। एनएसयूआई के लिए सबसे घातक यही बात सामने आई है कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर के घर पद्धर में उसका बोरिया बिस्तर गोल हो गया है। यहां पर एनएसयूआई को इसी से संतोष करना पड़ रहा है कि उपाध्यक्ष की कुर्सी बच गई है। एबीवीपी से सरकाघाट और जोगिंद्रनगर कालेज छिन गए हैं। यहां पर एनएसयूआई और एसएफआई ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवा कर एबीवीपी की चूलें हिला दी हैं। बीते वर्ष सरकाघाट में एबीवीपी की तूती बोलती रही है। धर्मपुर कालेज में एबीवीपी ने जीत की हैट्रिक लगा दी है। बासा और लंबाथाच कालेजों में एबीवीपी लगातार दूसरी मर्तबा जीत हासिल कर चुकी है। जिला में हुए छात्र संघ चुनावों में सबसे बड़ा उलटफेर जोगिंद्रनगर में हुआ है। लोक निर्माण मंत्री गुलाब सिंह ठाकुर के घर में एबीवीपी राजनीति की ऊबड़-खाबड़ धरातल पर पीछे रह गई है, जबकि एनएसयूआई और एसएफआई आगे निकल गई हैं। जोगिंद्रनगर कालेज बीते वर्ष एबीवीपी के कब्जे में था। रिवालसर में एबीवीपी और लडभड़ोल में एनएसयूआई ने जीत हासिल की है। जिला में एबीवीपी की आंधी तो चली है, लेकिन उसे बीते वर्ष के मुकाबले चार पदों का नुकसान हुआ है। यह चारों ही पद एसएफआई की झोली में गिरे हैं।

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