मंत्री के ‘घर’ पानी को हाय तौबा

सतीश शर्मा, सोलन

स्वास्थ्य मंत्री के गृह शहर के सबसे व्यस्ततम दो सार्वजनिक स्थानों पर शनिवार को पानी की आपूर्ति न होने के कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। क्षेत्रीय अस्पताल में पानी न आने के कारण जहां मरीज दुर्गंध से बेहाल रहे, वहीं अंतरराज्यीय बस अड्डे पर भी यात्री पानी के लिए भटकते रहे। 

जानकारी के अनुसार क्षेत्रीय अस्पताल में शुक्रवार सायं से ही पानी की आपूर्ति अचानक बंद हो गई थी। साफ-सफाई व अन्य कार्यों के लिए लगातार इस्तेमाल हो रहे पानी के कारण अस्पताल के जल भंडारण टैंक खाली हो गए। शनिवार सुबह अस्पताल  के सारे नल सूख गए, जिससे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लोगों को पीने का पानी भी बाहर से लाना पड़ा। वहीं, पानी न होने के कारण अस्पताल की सफाई-व्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई। चारों ओर फैली दुर्गंध से मरीजों और अस्पताल में आने वाले लोगों का बुरा हाल हो गया। पानी न होने की वजह से विभिन्न प्रकार के परीक्षण और शल्य चिकित्सा के कार्य भी प्रभावित हो गए। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. आरके बारिया ने बताया कि शुक्रवार शाम से अस्पताल में पानी की आपूर्ति बंद होने के कारण सफाई-व्यवस्था व अन्य कार्य प्रभावित हुए हैं। उन्होंने बताया कि आवश्यक कार्यों के लिए हैंडपंप से पानी मंगवाया गया।

उधर, सोलन के अंतरराज्यीय बस अड्डे पर भी शनिवार को पानी की आपूर्ति न होने के कारण यात्रियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। बस अड्डे के शौचालय में भी पानी न होने के कारण दुर्गंध से यात्री परेशान रहे। लोगों को पीने का बोतलबंद पानी भी दुकानों से महंगे दामों पर खरीदना पड़ा। परिवहन निगम के कर्मचारियों ने बताया कि बस अड्डे पर नियमित रूप से पानी की आपूर्ति न होने के कारण यात्रियों को अकसर परेशानी उठानी पड़ती है। उन्होंने बताया कि नगर परिषद के अधिकारियों को कई बार लिखित में प्रतिदिन पानी की आपूर्ति करने का आग्रह किया जा चुका है, लेकिन इसकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।  इस बारे में जब नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी अजमेर ठाकुर से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि अस्पताल की मुख्य पाइप लाइन टूटने से पानी की आपूर्ति बाधित हुई थी, लेकिन उसे दुरुस्त करके शाम को पानी की आपूर्ति को बहाल कर दिया गया है। बस अड्डे की पानी की समस्या के बारे में उनका जवाब था कि निगम के अधिकारियों को पानी की भंडारण क्षमता को यात्रियों की संख्या के अनुरूप बढ़ाना चाहिए, क्योंकि प्रतिदिन पानी की आपूर्ति कर पाना संभव नहीं है।

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