मोर्चे पर तीन लाख कालजेट

शिमला। प्रदेश में छात्र संघ चुनावों के लिए सरगर्मियां तेज हो गई हैं। एससीए चुनाव 97 शैक्षणिक संस्थानों में करवाया जाएगा। इनमें विवि व संस्कृत कालेज भी शामिल हैं। संस्कृत कालेजों में दूसरी मर्तबा एससीए चुनाव करवाए जा रहे हैं। प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला तीन लाख छात्र करेंगे। विवि प्रशासन ने मंगलवार शाम चुनावों के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। 27 अगस्त को होने वाले चुनावों की तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। वोटर लिस्ट बनाने का कार्य जोरों पर है। कालेजों को भी इस संबंध में उचित दिशा-निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं।

चुनावों की तिथियां घोषित होने के बाद छात्र संगठनों ने भी कमर कस ली है। सभी संगठन नंबर वन बनने की दौड़ में हैं। दो वर्षों के नतीजों पर गौर करें, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद प्रदेश में सबसे बड़ा छात्र संगठन बनकर उभरा है। पिछले वर्ष अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने प्रदेश में 195 सीटों पर जीत हासिल की थी। एनएसयूआई की 138 सीटें आई थीं। एसएफआई ने 41 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि 14 सीटें अन्य के खाते में गई थीं।  चुनावों की तिथियां घोषित होने के बाद छात्र संगठनों ने अपने अपने मुद्दे तय कर प्रचार भी शुरू कर दिया है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के प्रदेश अध्यक्ष यदुपति ठाकुर ने कहा कि चुनावों के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव चुनावी टिप्स देने के लिए इसी सप्ताह प्रदेश का दौरा करेंगे। श्री ठाकुर ने बताया कि प्रदेश की सभी सीटों पर एनएसयूआई चुनाव लड़ने जा रही है। इस बार सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। छात्रों की समस्याएं, रिक्त पड़े पदों को भरना जैसे मुख्य मुद्दे रहेंगे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत मंत्री नवीन शर्मा ने कहा कि एबीवीपी प्रदेश में तीन सौ सीटों पर जीत हासिल करेगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा के व्यापारीकरण, कालेजों में छात्रों को मूलभूत सुविधा व विश्वविद्यालय से धारा-35 ए को हटाना मुख्य रूप से चुनावी मुद्दे होंगे।

उन्होंने बताया प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। एबीवीपी छात्र हित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाती रही है, जिसके चलते उनके पास छात्रों का अधिक समर्थन है। स्टूडेंेट फेडरेशन आफ इंडिया के प्रदेश सचिव विजेंद्र मेहरा ने कहा कि एसएफआई इस बार अधिक सीटों पर जीत हासिल कर जीत का परचम लहराएगी। उन्होंने बताया कि छात्रों का समर्थन उनके साथ है। शिक्षा के निजीकरण, कालेजों व विवि मंे रिक्त पड़े पदों को भरना, मूलभूत सुविधाएं, विवि की स्वायत्तता बहाली की मांगें प्रमुख मुद्दे रहेंगे।

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