राजधानी में भगवा आंधी का बोलबाला

दिव्य हिमाचल ब्यूरो, शिमला

शिमला जिला के कालेजों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने लाल दुर्ग को भेदने में कामयाबी हासिल की है। केंद्रीय छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी ने 24 सीटें हासिल कर पहला स्थान झटका है, जबकि एसएफआई 21 सीटें झटक कर दूसरे स्थान पर रही है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन को 19 सीटों पर ही जीत मिली है। प्रदेश विवि में एसएफआई ने फिर से चारों सीटों पर जीत दर्ज की है। शिमला जिला के गोविंद बल्लभ पंथ कालेज रामपुर में एसएफआई ने अध्यक्ष, एनएसयूआई ने उपाध्यक्ष और सचिव तथा एबीवीपी ने सहसचिव पद पर जीत दर्ज की है। कोटशेरा कालेज शिमला में एसएफआई ने चारों सीटों पर जीत दर्ज की है। संजौली कालेज में चारों सीटों पर एनएसयूआई ने कब्जा किया है।  आरकेएमवी में एसएफआई ने चारों सीटें जीती हैं। सुन्नी कालेज में एनएसयूआई ने चारों सीटें जीती हैं। ठियोग कालेज में कई सालों से कब्जा जमाए बैठी एसएफआई ने चारों सीटें जीतकर फिर से लाल झंडा फहराया है। संस्कृत कालेज क्यारटू, ठियोग, संस्कृत कालेज फागली तथा  कोटखाई कालेज, सीमा कालेज रोहड़ू, तुंगिश कालेज ठियोग तथा नेरवा कालेज में एबीवीपी ने क्लीन स्वीप किया है। जांगला कालेज कोटखाई तथा सावड़ा में एनएसयूआई ने चारों सीटों पर जीत दर्ज की है। शिमला जिला के कालेज में मुख्य मुकाबला एसएफआई और एबीवीपी के बीच रहा। विद्यार्थी परिषद ने अधिकांश जिला के संस्कृत महाविद्यालय में जीत दर्ज की है, जबकि विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को इस बार भी असफलता हाथ लगी है। इस बार के चुनावों में एबीवीपी व एनएसयूआई के अच्छे प्रदर्शन से संबधित दोनों बड़े दलों के नेताओं को भी आने वाले वक्त के लिए उम्मीदें बंधी हैं।  खासकर कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले रोहड़ू व कोटखाई जैसे कालेजों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदर्शन ने भाजपा नेताओं को नया संबल दिया है। कालेजों में सुबह से ही चुनावों को लेकर खासी सरगर्मियां देखी गईं। उत्सव की तरह छात्र सुबह से ही मतदान करने के लिए पहुंच गए थे। छात्र संगठन के बड़े नेता अंतिम क्षण में भी छात्रों को रिझाने के लिए दिनभर जुटे रहे।

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