लाल दुर्ग में नहीं लगी सेंध

अमन अग्निहोत्री, हमीरपुर

इस बार संपन्न हुए छात्र संघ चुनावों में हमीरपुर जिला में फिर से भगवा बिग्रेड सबसे बडे़ छात्र संगठन के रूप में उभर कर सामने आई है, लेकिन इस बार परिषद को पिछले वर्ष के  मुकाबले पांच सीटों का नुकसान सहना  पड़ा है। कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई का कुनबा इस बार जिला में बढ़ गया है। बड़सर में तो एनएसयूआई ने पहली बार इतना प्रदर्शन करते हुए तीन में से दो कालेजों पर कब्जा कर स्थानीय नेताओं को विपरीत संकेत दे दिया है। लाल सेना का गढ़ बन चुके जिला के सबसे बडे़ कालेज हमीरपुर में तीन साल बाद परिषद एक सीट लेने में कामयाब तो हो गई है, लेकिन सदर से लाल रंग का जादू पूरी तरह से हट नहीं सका है। वहीं हमीरपुर जिला के चुनाव इस बार हिंसा को लेकर भी याद रखे जाएंगे। शासन, सत्ता और प्रभाव के दुरुप्रयोग के आरोप के साथ ही हमीरपुर जिला के कालेजों में इस बार पिछले वर्ष के मुकाबले छात्र हिंसा का भी तांडव देखने को मिला है। यही नहीं हमीरपुर के कालेजों में पहली बार देशी कट्टे जैसे खतरनाक हथियार लहराने का भी हैरतअंगेज मामला सामने आया है।  पिछले वर्ष के छात्र संघ चुनावों पर नजर डालें, तो इस बार भी परिषद का हमीरपुर वर्चस्व कायम है। परिषद को पिछली बार जिला के आठ प्रमूख कालेजों में जहां 22 सीटें प्राप्त हुई थीं, वहीं इस बार यह बढ़त कम होकर 17 पर रुक गई है। पिछली दफा जहां एनएसयूआई को मात्र छह सीटें मिली थीं, वहीं इस बार संगठन को 10 सीटें मिली हैं। इसी तरह एसएफआई इस बार भी पिछले वर्ष की तरह पांच सीटों पर ही खड़ी है।  

उधर, अगर हमीरपुर कालेज के चुनाव की बात करें, तो इस बार यहां पर व्यापक हिंसा देखने को मिली है। यहां छात्र संगठन में कई बार टकराव हुआ और इसमें कई छात्र घायल भी हो गए। हमीरपुर कालेज में इस बार परिषद की जीत की पूरी संभावना प्रकट की जा रही थी और इसे लेकर  कालेज प्रबंधन, पुलिस प्रशासन, सत्ता और स्थानीय भाजयुमो नेताओं पर अपना प्रभाव का दुरुप्रयोग करने के कई आरोप भी अन्य छात्र संगठनों ने पिछली बार के मुकाबले अधिक लगाए, लेकिन इस सबके बाद भी परिषद सिर्फ अध्यक्ष पद पर काबिज हो सकी है। चुनाव से एक दिन पहले हमीरपुर कालेज में हुई हिंसा को भी परिषद की हार का कारण माना जा रहा है, क्योंकि परिषद के दो उम्मीदवार तो इस बार काफी कम अंतर से हारे हैं। वहीं अगर बड़सर विस के तीन प्रमुख कालेजों पर नजर डालें, तो यहां पर पूरी तरह से एनएसयूआई का कब्जा दिख रहा है। जबकि पिछले बार एनएसयूआई को बड़सर में चार ही सीटें मिल सकी थीं, लेकिन इस बार दीन दयाल कालेज मैहरे में चार और चकमोह कालेज में एनएसयूआई तीन सीटों पर विजयी हुई है। हालांकि एनएसयूआई बड़सर कालेज में इस बार चारों सीटों पर हार गई है। उधर,  शिक्षा मंत्री के गृह विस क्षेत्र भोंरज में भगवा सेना हावी रही है। नादौन कालेज में इस बार सुखविंदर सिंह सुक्खू का प्रभाव फिर से देखने को मिला है। एनएसयूआई को पिछले वर्ष यहां एक भी सीट नहीं मिल सकी थी, लेकिन इस बार एनएसयूआई ने  तीन सीटों पर कब्जा जमाया है। सुजानपुर कालेज में परिषद लगातार पांचवी बार सफल रही है, लेकिन एक सीट का नुकसान यहां भी परिषद को झेलना पड़ा है।

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