वन बचाने के प्रयास कितने सही

भगवान की दी हुई अमूल्य वन संपत्ति को बचाने के लिए प्रदेश के सिरमौर जिला की किंकरी देवी ने क्या कुछ नहीं किया था। उन्हीं के पद चिन्हों पर चलने की कोशिश कर रही हैं नूरपुर उपमंडल के गांव भटोली लमिया की शैली वर्मा। वह ‘जंगल बचाओ’ अभियान में कूद पड़ी हैं। बहन शैली वर्मा का यह कार्य कठिन है। उनका मुख्य बिंदु है पर्यावरण को बचाना। यदि प्रशासन कार्रवाई नहीं करेगा, तो विवश होकर वन बचाओ आंदोलन चलाना पड़ेगा, परंतु कितने लोग इस पुण्य कार्य में जुड़ पाएंगे। सरकार की वन संपदा बचाओ की दोगली नीति है, सरकार को वोट चाहिए। वन विभाग व वर्करों को नोट चाहिए। प्रेस से जुड़े लोग भी चढ़ते सूर्य को सलाम करने की नीति अपनाते हैं। जिसकी सरकार उसी के वफादार। जनता के बीच से कोई भी आदमी वनों के विनाश के बारे में विभाग के बड़े-बड़े अधिकारियों को लिखे, सरकार को लिखे, प्रेस में दे, कोई भी अमल नहीं होता।  वन रक्षक डिप्टी रेंजर की चैकिंग को रेंजर या एसीएफ भेजा जाता है। गोल-मोल करके जनता को नुकसान के बारे बिना पूछे चला जाता है। सरकार वन विभाग के झूठे आंकड़ों के जाल में फंसकर रह जाती है। सरकार ही कानून बनाती है कि एफसीए अधिनियम का वन विभाग कड़ाई से अनुपालन करे। दूसरी ओर रात-दिन मशीनें लगाकर वन क्षेत्र से सड़कें निकल रही हैं। वर्षों से रोपे गए पौधों से कितने पौधे कामयाब हुए हैं, ये सूचनाएं सार्वजनिक की जाएं और इन सूचनाओं के समर्थन में जनमत की राय भी ली जाए। वन विभाग के पास झूठी सूचना गलत आंकड़े पेश करने के सिवाय कुछ नहीं है। वन विभाग की लापरवाही व सरकार की कथनी-करनी के अंतर से ही वन संपदा का नाश हो रहा है।

एसएस ठाकुर, छतरी, मंडी

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