विनाश को भ्रष्टाचार जिम्मेदार

अशोक कुमार ठाकुर, कुल्लू

प्रदेश में दवाइयों के सैंपल फेल, खाद्य सामग्री के सैंपल फेल और निर्माण सामग्री के भी सैंपल फेल। फिर हम प्रकृति को विनाश का दोषी कैसे मान लें। सड़कें, पुल, डंगे फेल सामग्री से बनाए जाएंगे तो यही सब होगा। प्राकृतिक रूप से तो यह प्रदेश संवेदनशील है ही, पर भ्रष्टाचार ने इसे और भी ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। जैसे-जैसे विज्ञान प्रगति करता जा रहा है, वैसे-वैसे प्रकृति उग्र होती जा रही है। हम जीवन को अनुकूल बनाने के चक्कर में प्रकृति को अपने प्रतिकूल करते जा रहे हैं। पेड़ की ठंडी छांव की बजाय एसी को तरजीह देंगे, तो हम जोखिम ही उठाएंगे। यह सत्य है कि प्रकृति प्राणियों के लिए बनी है पर प्रकृति अपने पर प्रहार सहन नहीं करती, वही मनुष्य कर रहा है। जगह-जगह परियोजनाओं को बनाने की होड़ में जीवन को छोटा करता जा रहा है मनुष्य। अब तो लगता है हमें प्रलय का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि प्रलय को तो हम स्वयं आमंत्रित कर रहे हैं। हम स्वयं ही खत्म करते जा रहे हैं और बिना मानवता के जीवन कभी भी खत्म हो सकता है…

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