शराब की वेस्टेज पर न वसूलें टैक्स

शिमला। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि शराब बनाने की प्रक्रिया में ‘स्पिरिट की वेस्टेज’ पर प्रदेश की सरकार वर्ष 1999 से पहले के मामलों पर ड्यूटी (कर) नहीं लगा सकती है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि 15 अक्तूबर, 1999 के पश्चात प्रदेश सरकार एक दशमलव पांच प्रतिशत से अधिक वेस्टेज पर ड्यूटी लगा सकती है। न्यायालय ने कहा कि वर्ष 1999 से पूर्व वित्तायुक्त एवं आबकारी कराधान अधिकारी द्वारा वेस्टेज पर ड्यूटी लगाने हेतु सीमा निर्धारित नहीं की थी। अतः सरकार ड्यूटी नहीं लगा सकती थी। ये आदेश उच्च न्यायालय ने रंगर ब्रीवरी द्वारा दायर याचिकाओं पर पारित किए। याचिकाकर्ता के अनुसार प्रदेश सरकार पीने योग्य शराब पर ही ड्यूटी लगा सकती है तथा शराब बनाने हेतु उपयोग की गई स्पिरिट पर ड्यूटी नहीं लगा सकती है। याचिकाकर्ता के अनुसार स्पिरिट मानवीय उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है। प्रदेश सरकार ने स्पिरिट पर ड्यूटी लगाने के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि जो स्पिरिट शराब बनाने के लिए सप्लाई की जाती है तथा जितनी शराब बनाई जाती है उसके बीच में वेस्ट हुई स्पिरिट पर ड्यूटी लगाना पंजाब एक्साईज एक्ट के अनुसार उचित है। न्यायालय ने सरकार की दलील को खारिज करते हुए कहा कि अक्तूबर, 1999 से पूर्व वेस्टेज पर ड्यूटी लगाने का कोई प्रावधान नहीं था।

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