शिशु मां के दूध से वंचित

हिमाचल प्रदेश में के कई नौनिहालों को आज भी पौष्टिक दूध नहीं मिल पा रहा है। नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे के मुताबिक कुल 53 फीसदी महिलाएं शिशुओं को अपना दूध नहीं पिलाती हैं। इसका कारण यह नहीं है कि महिलाओं के दूध में पौष्टिकता की मात्रा कम हो गई है, बल्कि 20 प्रतिशत महिलाएं अपनी फिगर बचाने के चक्कर में अपने शिशुओं को दूध नहीं पिलातीं और 33 फीसदी महिलाएं गाय, भैंस व बकरी के दूध को ज्यादा पौष्टिक मानती हैं। कुल मिलाकर कई माताएं अपने बच्चों को ढेरों बीमारियां दे रही हैं। हिमाचल में भी अपने बच्चों को जन्म दे रही माताओं में 20 फीसदी अपने बच्चों को दूध नहीं पिलातीं। हैरत तो इस बात पर है कि हर वर्ष चलने वाले जागरूक कार्यक्रमों के बावजूद हिमाचल की शहरी महिलाएं ही नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाएं भी अपने दूध की पौष्टिकता से अपने बच्चों को दूर रखती हैं। यही दूध बच्चों को रोगों से दूर तथा तंदरुस्त रखता है। ये सब बातें जानकर भी न जाने क्यों अधिकतर महिलाएं अपने बच्चों को पौष्टिक दूध से वंचित रखती हैं। क्या स्वास्थ्य विभाग ने कभी इस पर गौर किया है?

दयाल चंद, रघुवंशी

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