संगठनों ने दिन-रात मांगे वोट

शिमला। केंद्रीय छात्र संघ के चुनावों के लिए काउंटडाउन शुरू हो चुका है। विवि में एबीवीपी व एसएफआई के बीच ही कांटे की टक्कर होगी। जीत के दावे कर रहे दोनों छात्र संगठन एक दूसरे के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप लगाकर उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। रविवार को छात्रावासों में रात नौ बजे तक छात्र संगठन प्रचार में जुटे रहे। छात्र संगठनों का मिशन कैंपेन रविवार को डोर-टू-डोर शुरू हुआ। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के इकाई अध्यक्ष नरेंद्र ठाकुर पूरे पैनल सहित समरहिल, सांगटी के कई स्थानों पर प्रचार में जुटे रहे। एसएफआई ने डोर-टू-डोर कैंपेन के अलावा एसएमएस के माध्यम से वोट की अपील की। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के चुनावी इतिहास में एसएफआई का ही पलड़ा भारी रहा है। वर्ष 2001 में एबीवीपी ने एसएफआई का सूपड़ा साफ कर एससीए पर कब्जा जमाया था। उस समय प्रदेश में भाजपा सरकार थी। मौजूदा समय में भी प्रदेश में भाजपा सरकार है। एबीवीपी इस बार जीत का पूरा दावा कर रही है। जीत का सेहरा किस के सिर पर बंधता है, यह तो 27 अगस्त को ही पता चलेगा। एचपीयू में चुनावों के लिए मतदाता सूची सोमवार को जारी होगी। इस बार विवि में 2774 छात्र एन्रोल हैं। कितने छात्र मतदान करेंगे, यह सूची जारी होने के बाद तय होगा। विवि में चुनावों के लिए 27 पोलिंग बूथ बनाए हैं। एबीवीपी इस बार शिक्षा के निजीकरण को मुख्य मुद्दा बनाकर चुनावी मैदान मंे उतरी है। एचपीयू की स्वायत्तता बहाली, मैस व होस्टल की सुविधा, रिक्त पद भरना मुख्य मुद्दे रहने वाले हैं। एसएफआई भी धारा-35 ए को हटाना, शिक्षा के बाजारीकरण को बंद करना, शिक्षक व गैर शिक्षकों के पद भरना, विवि के बजट को बढ़ाना व होस्टल की सुविधा  जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ रही है।

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